सांसद ने अपनी शिकायत में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर एआई तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करना गंभीर अपराध है। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो भविष्य के लिए नजीर बने। मामले से जुड़े स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं।
शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना जाैनपुर ने मानहानि, फर्जी डिजिटल सामग्री प्रसारित करने और आईटी एक्ट से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल डाटा और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
वहीं, मामले में नामजद भाजपा नेता आमोद सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी कोई गलत मंशा नहीं थी। उनका कहना है कि संबंधित तस्वीर पहले से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी, जिसे उन्होंने डाउनलोड कर सीमित और मर्यादित शब्दों के साथ साझा किया था। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने पोस्ट हटा दी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि तस्वीरें किस स्तर पर तैयार की गईं और उन्हें सबसे पहले किस अकाउंट से प्रसारित किया गया।