क्या है ऑयल बॉल विधि
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि लकड़ी के बुरादे को कपड़े की पोटली में बांधकर छोटे-छोटे बॉल बनाए गए। इन्हें निष्प्रयोज्य इंजन ऑयल में डुबोया जाता है। इसके बाद बॉल को ठहरे हुए पानी में डाला जाता है, जिससे ऑयल की परत धीरे-धीरे पानी की सतह पर फैल जाती है, इस कारण मच्छरों के लार्वा को ऑक्सीज़न की उचित मात्रा नहीं मिल पाती और लार्वा नष्ट हो जाता है।
ऐसे हुआ प्रायोगिक अध्ययन
एक खाली प्लाट जिसमें कई महीनों से पानी भरा था, जिसमें लार्वा पाया गया। लार्वा घनत्व 10 था। ऑयल बॉल का प्रयोग किया गया। 24 घंटे के उपरांत ऑयल बॉल के चारों ओर ऑयल की परत पानी की सतह पर लगभग तीन मीटर की परिधि में फ़ेल गई, जिससे लार्वा की संख्या में गिरावट देखी गई।
लार्वा घनत्व दो पाया गया। साथ हीएक बड़ी नाली, जिसमें काफी संख्या में लार्वा थे। वहाँ बॉल का प्रयोग किया गया। 24 घंटे के बाद अध्ययन में देखा गया कि ऑयल बॉल 20 से 30 सेमी की परिधि में लार्वा नष्ट हुए।