27 मार्च के बाद सूत्र खंगालने और आरोपी की निशानदेही पर सीआईबी ने सात अप्रैल को मकबूल आलम रोड़ से निजाम अशरफ को गिरफ्तार किया, लेकिन मुख्य आरोपी पकड़ से दूर था। जांच अधिकारी अभय कुमार राय ने बताया कि अभियुक्त बेहद शातिर था। वह फर्जी पते पर सिम लेता था। कभी भी स्वयं सामने नहीं आता। फोन से वाहन चालक से संपर्क करता सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजता था। स्टेशन यार्ड से विक्रय स्थल पर माल पहुंचने के बाद विक्रय का पैसा लेकर चला जता था।
सीआईबी के हत्थे चढ़ा मुख्य आरोपी 2018 में सेना से रिटायर है। जांच अधिकारी अभय कुमार राय के मुताबिक आरोपी आर्मी से सेवानिवृत्त होने के बाद रणविजय सिंह नोएडा में रहता था। कभी कभार ही वह गांव आता था। जिसके चलते गांव वाले उसके इस कृत्य से अंजान थे।
अपराध करने के लिए फर्जी पहचान पर सिम लेता था। किसी अन्य व्यक्ति के आधार कार्ड से सिम लेने के चलते वह वह जांच दल से पकड़ से दूर रहा था। जांच अधिकारी के मुताबिक पुलिस ने मिले सात सिम और सीडीआर पड़ताल करने के बाद एक पुख्ता क्लू हासिल किया। सिम के आधार पर नोएडा में भी छापा मारा गया, लेकिन आरोपी पकड़ से दूर था।
बलिया में मुखबिर की पुख्ता जानकारी पर वह पकड़ में आया। फर्जी सिम के माध्यम से बात कर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर खुले में पड़े रेल लाइन और बिजली के सरकारी सामान को चोरी कर पटना में बेचता था। अपराध को अंजाम देने के बाद सिम और मोबाइल को नष्ट कर देता था।