ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चों का बीएचयू के बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। बाल रोग विभाग में हर बुधवार और शनिवार को स्पेशल क्लीनिक भी चलाई जाती है। बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि हर महीने 20 नए बच्चों में कैंसर की पुष्टि हो रही है। इनमें 10 ब्लड कैंसर के रहते हैं। बाकी में ब्रेन ट्यूमर, गले, आंत और फेफड़े और आंख के कैंसर की दिक्कत रहती है। हर साल करीब 200 से ज्यादा कैंसर बच्चों का इलाज हो रहा है। तीन साल पहले ये आंकड़ा 150 था। इन बच्चों की कीमोथेरेपी की जा रही है।
मिलावटी खाद्य सामग्री के सेवन से ज्यादा दिक्कत
भारतीय बाल अकादमी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक राय ने बताया कि बच्चों में ब्लड कैंसर की समस्या बढ़ी है। ओपीडी में रोज इलाज किया जाता है। हर महीने तीन से चार ब्लड कैंसर पीड़ित मिल जाते हैं। इन बच्चों को इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा जाता है। ब्लड कैंसर की सबसे बड़ी वजह मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन है। बच्चे बाजार के खान-पान पर ज्यादा जोर देते हैं। खाद्य सामग्री में रासायनिक तत्व की मिलावट ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
ब्लड कैंसर के ये हैं लक्षण
- लंबे समय तक बुखार हो, बार-बार एंटी बायोटिक देना पड़े।
- गले में गिल्टियां हों और ठीक न हों।
- बच्चे के शरीर में तेजी से खून कम हो, कमजोरी महसूस होना।
- प्लेटलेट्स में गिरावट।
बीएचयू के बाल रोग विभाग से मिले कैंसर पीड़ित बच्चों के आंकड़े
- 1 से 5 साल : 25 फीसदी
- 5 से 12 साल : 60 फीसदी
- 12 से 16 साल : 15 फीसदी