काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि माता का गज पर आगमन और कंधे पर प्रस्थान दोनों स्थितियां शुभदायक हैं। नवरात्र में तिथि की बढ़ोतरी अच्छी मानी जाती है। देश का व्यापार बढ़ेगा, पड़ोसियों से संबंध सुधरेंगे और यह शुभ फलदायक है। ये संकेत है कि आने वाला समय सुख, समृद्धि से परिपूर्ण होगा। दो अक्तूबर को माता को विदाई दी जाएगी और विजयादशमी मनाई जाएगी। नवरात्र में मां की आराधना करने से इंसान के जीवन दुख मिट जाते हैं और उसके जीवन में सकारात्मकता के साथ ही शक्ति का संचार होता है।
प्रतिपदा पर हस्त नक्षत्र में होगी घटस्थापना
शारदीय नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर होगी। इस दिन सुबह से ही हस्त नक्षत्र लग रहा है। इस दौरान कलश स्थापना बहुत शुभकारी मानी जाती है। इसके साथ इस दिन पूरे दिन शुक्ल योग भी मिल रहा है।
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ : 21 सितंबर, 2025 मध्यरात्रि 1.24 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त : 22 सितंबर, 2025 मध्यरात्रि 2.55 बजे
हस्त नक्षत्र : सुबह 11.55 बजे के बाद
अमृत मुहूर्त : सुबह 6.19 बजे से 7.49 बजे तक
शुभ मुहूर्त : सुबह 9.14 बजे से 10.49 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11.55 से 12.43 बजे तक रहेगा
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
मां दुर्गा का आगमन सोमवार के दिन हो रहा है, तो इस बार उनका वाहन हाथी है। मान्यता के अनुसार मां हाथी पर आती हैं, जो सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक है।