पर्यटन के साथ ही बनारस में ड्रग्स के कारोबार ने तेजी से पैर फैलाया है। पुलिस, आबकारी और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों का दबी जुबान मानना है कि देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही के चलते गांजा, चरस, हेरोइन, अफीम सहित अन्य मादक पदार्थ की बिक्री यहां हर महीने करोड़ों रुपये की होती है। ड्रग्स की आसानी से उपलब्धता के सबसे बड़े केंद्र गंगा घाट और इनसे सटे आसपास के इलाके हैं। नशाखोरी का आलम यह है कि यहां लोग हर महीने चार लाख बोतल शराब और दस लाख बोतल बीयर गटक जाते हैं।
इलाकाई पुलिस और आबकारी विभाग की शह पर जिले के सभी भांग के ठेके पर गांजा खुलेआम 25, 50 और सौ रुपये की पुड़िया में बिकता है। गंगा घाटों पर विदेशी पर्यटकों को यही गांजा सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक में बेचा जाता है। हालांकि जिला आबकारी अधिकारी वाईआर यादव कहते हैं कि भांग के ठेके पर गांजा बिकने की जानकारी नहीं है। उधर, आलम ये है कि विदेशी पर्यटकों की मांग पर चरस भी गंगा घाटों के किनारे आसानी से मिल जाती है।
हेरोइन का कारोबार शहर में जैतपुरा के नक्खी घाट व औसानगंज, आदमपुर, सारनाथ और मदनपुरा सहित कुछेक अन्य इलाकोें में छह रैकेट के सहारे संचालित होता है। हेरोइन के लती ज्यादातर निमभन आय वर्ग के लोेग हैं। अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों के अनुसार बनारस में प. बंगाल और नेपाल से तस्करी कर हेरोइन लाई जाती है।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि का कहना है कि सभी थानाध्यक्षों को मादक पदार्थों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाकर कार्रवाई का निर्देश है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।