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काशी में मुफ्त अंतिम संस्कार योजना फेल

Sun, 26 Jun 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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 हरिश्चंद्र घाट पर विद्युत शवदाह गृह में अब नि:शुल्क अंतिम संस्कार नहीं होगा। करीब 15 महीने पहले शुरू हुई यह योजना प्रबंधन के अभाव में फेल हो गई है। दो करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल को चुकता करने के दबाव और कर्मचारियों के मानदेय के भुगतान की समस्या को देखते हुए गंगा मिशन वेलफेयर सोसाइटी ने मुफ्त में विद्युत शवदाह गृह चलाने से इनकार कर दिया है। अब एक शव जलाने के लिए छह सौ रुपये शुल्क देने होंगे। 
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लंबे समय से बंद पड़े विद्युत शवदाह गृह को 24 दिसंबर 2014 को नगर निगम ने कोलकाता की सामाजिक संस्था गंगा मिशन वेलफेयर सोसाइटी को सौंप दिया था। तब निगम के साथ हुए करार में सोसाइटी के हाथ में शवदाह गृह संचालन की कमान सौंपी गई थी। शवदाह गृह को मुफ्त में संचालित करने की घोषणा की गई थी। शव रखने के लिए बांस के सौ रुपये लिए जाते थे। इस रकम को भी शहर के उद्यमी केशव जालान शवदाह गृह प्रबंधन को अदा करते थे। डोमराज परिवार को आग देने के एवज में मिलने वाले प्रति शव सौ रुपये के टैक्स को नगर निगम की ओर से भुगतान किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। करीब 15 महीने मुफ्त अंतिम संस्कार चलने के बाद दो जून को तकनीकी खराबी की वजह से विद्युत शवदाह बंद हो गया। छह जून तक पैनल जले होने की वजह से काम शुरू नहीं हो सका। इस बीच बिजली का करीब दो करोड़ रुपये बकाया आने के बाद सोसाइटी की दिक्कतें और बढ़ गईं। 

सोसाइटी की ओर से विद्युत शवदाह गृह के प्रबंधन का काम देख रहे आमोद अग्रवाल ने बताया कि निगम ने बिजली का बिल माफ कराने के लिए कहा था लेकिन वह अपने वादे से मुकर गया। सोसाइटी को सिर्फ 13 लाख रुपये बिजली बिल भुगतान करना है। बाकी रकम पहले की बकाया है। आमोद का कहना है कि आजिज आकर छह सौ रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया है। पांच सौ रुपये अंतिम संस्कार के रूप में और सौ रुपये बांस के लिए लिया जा रहा है। मुफ्त में विद्युत शवदाह गृह चलाना संभव न होने के बाद यह निर्णय लिया गया। 
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