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Varanasi News: उद्यमियों ने रमना टेक्सटाइल पार्क के लिए मांगी 200 एकड़ जमीन

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हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के रथयात्रा स्थित कार्यालय में बुधवार को इंवेस्ट यूपी की ओर से उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल पॉलिसी (वस्त्र नीति) को लेकर एक बैठक की गई। इसमें बुनकरों की समस्याओं और टेक्सटाइल पार्क के निर्माण के बाद आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हुई।
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बैठक में उद्यमियों ने रमना में प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क में हथकरघा, पावरलूम, डाइंग (रंगाई) और पैकेजिंग सहित वस्त्र उद्योग से जुड़े सभी विविध क्षेत्रों को समुचित स्थान देने की मांग की। उद्यमियों ने शासन से इसके लिए प्रस्तावित की गई 75 एकड़ भूमि को बेहद अपर्याप्त बताते हुए मांग की कि काशी के वस्त्र उद्योग के व्यापक विस्तार को देखते हुए टेक्सटाइल पार्क के लिए कम से कम 200 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाए।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वास्तविक बनारसी साड़ी वही है जो पारंपरिक हथकरघा (हैंडलूम) पर तैयार होती है। वर्तमान में सूरत और दक्षिण भारत के कई राज्यों में पावरलूम के जरिए बनारसी डिजाइन की नकल कर धड़ल्ले से साड़ियां बनाई जा रही हैं। इस क्षेत्र में नई पीढ़ी की भागीदारी लगातार घटती जा रही है। बुनकर परिवार अपनी इस पुश्तैनी कला और अनूठी परंपरा को अगली पीढ़ी को सौंपना तो चाहते हैं, लेकिन कई बार व्यावहारिक समझ की कमी के कारण बाल श्रम कानूनों के नाम पर पारंपरिक पारिवारिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे इस कला के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
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बैठक की अध्यक्षता इंवेस्ट यूपी के सहायक महाप्रबंधक (पॉलिसी) निखिल दीक्षित और सहायक महाप्रबंधक (निवेश प्रोत्साहन) समीर मेहंदी ने संयुक्त रूप से की। बैठक में देवेंद्र मोहन पाठक, राकेश कांत राय, शैलेश प्रताप सिंह, मनोज कुमार जायसवाल और संजीव देववंशी सहित कई कारोबारी मौजूद रहे और अधिकारियों को एक मांग पत्र भी सौंपा।
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