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उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से की मंडी शुल्क रद्द करने की मांग

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मंडी शुल्क खत्म करने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शुल्क को लेकर शनिवार को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस मौके पर मंडी शुल्क रद्द करने का मांगपत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
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फूड कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन दीपक बजाज के नेतृत्व में निजी क्षेत्र के रोलर फ्लोर मिलरों की समस्याओं को रखा गया। उद्यमियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक गेहूं उत्पादन करने वाला प्रदेश है। निजी क्षेत्र में 250 से अधिक रोलर फ्लोर मिल (आटा मिल) हैं। जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 50 लाख टन है। इन मिल के उत्पाद का अधिकांश भाग अन्य प्रांतों में जाता है। उत्तर प्रदेश में गेहूं पर 1.5 प्रतिशत (मंडी शुल्क एक प्रतिशत और 0.5 प्रतिशत विकास सेस) मंडी शुल्क लगने से उत्तर प्रदेश का उत्पाद महंगा हो गया है। इस कारण बिक्री में काफी गिरावट आई है। वार्षिक उत्पादन क्षमता 50 लाख टन से घटकर मात्र 20 से 25 प्रतिशत यानी 10 से 12 लाख टन पर सिमट गई है। प्रदेश की आटा मिल आर्थिक संकट से जूझते हुए लगातार बंद हो रही हैं। उद्यमियों नेे मंडी शुल्क अभिलंब रद्द करने का मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से प्रेम मिश्रा, अशोक जायसवाल, अनुज डिडवानिया आदि उद्यमि शामिल थे।
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