वाराणसी। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस बार ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चारों पदों पर एक साथ मतदान हो सकता है। पिछली बार वर्ष 2015 में ग्रामीण मतदाताओं को दो बार मतदान करना पड़ा था।
पहले चरण में वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण 15 सितंबर से शुरू हो सकता है। इसमें 18 साल की आयु पूरी करने वाली युवाओं के नाम जोड़े जाएंगे। इस बाबत आयोग की तरफ से सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। पंचायत एवं निकाय के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि जिले के 699 गांव के लिए 1000 बीएलओ की आवश्यकता होगी। इनकी तैनाती के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। आयोग से निर्देश मिलते ही पुनरीक्षण का काम शुरू हो जाएगा। पुनरीक्षण के दौरान 2015 से अब तक मृत या दूसरे राज्य चले गए मतदाता और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटाए जाएंगे। 2015 से पहली जनवरी 2021 तक 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नए वोटर भी शामिल किए जाएंगे। वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का काम करीब साढ़े तीन महीने चलेगा। इसमें ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर बूथ लेबल आफिसर परिवार के सदस्यों में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का सत्यापन करेंगे। पुनरीक्षण के काम में बूथ लेबल आफिसर द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्टेशनरी आदि की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने को कहा गया है। इसे बीएलओ किट कहते हैं।
अप्रैल-मई में चुनाव संभव
अगले साल फरवरी-मार्च में यूपी बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण, शहरी क्षेत्र में शामिल पंचायतों को घटाते हुए नया परिसीमन, सीटों का नए सिरे से आरक्षण निर्धारण करने आदि में छह महीने तक का समय लग सकता है। वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अगर शुरू होता है तो सारे काम अगले साल मार्च तक पूरे हो पाएंगे। इस लिहाज से पंचायत चुनाव अप्रैल-मई में ही होने की उम्मीद है।
61 गांवों में खत्म होगी ग्राम प्रधान की कुर्सी की जंग
आगामी पंचायत चुनाव में वाराणसी के 61 गांव में ग्राम प्रधान की कुर्सी की जंग खत्म होगी। अधिसूचना के बाद नगर निगम की सीमा में 61 ग्राम पंचायतों (आंशिक पंचायत समेत 79 राजस्व गांव) के शामिल होने के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का नक्शा बदल जाएगा। हरहुआ, चिरईगांव व काशी विद्यापीठ ब्लाक के इन गांवों में इस बार बीडीसी व ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या घट जाएगी। नियमत: दो हजार की आबादी पर एक बीडीसी यानी क्षेत्र पंचायत सदस्य की सीट होती है। तीनों ब्लाकों में नब्बे से ज्यादा पंचायत सदस्य और 800 से अधिक ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या कम हो जाएगी। साथ ही 61 ग्राम प्रधान की कुर्सी की जंग खत्म होगी।