हेरिटेज सिटी डेवलेपमेंट एंड आगोमेंटेशन योजना (हृदय) के तहत गंगा के चौरासी घाटों की सफाई पांच मैकेनाइज्ड बोट के सहारे की जाएगी।
इसके अलावा, यहां के लोलार्क सहित 11 प्रमुख कुंड, पक्कामहाल क्षेत्र और धरोहर स्थलों की ओर जाने वाली 23 किलोमीटर लंबी गलियों, सभी प्रमुख मंदिर सारनाथ क्षेत्र सहित पुरातात्विक व ऐतिहासिक महत्व के सभी स्थानों और उनके आसपास चौबीस घंटे सफाई की पुख्ता व्यवस्था होगी।
इस काम के लिए पांच सौ सफाई कर्मियों की आवश्यकता पड़ेगी। प्लानर इंडिया द्वारा तैयार की गई इसकी डीपीआर का सोमवार की शाम नगर निगम के सभागार में प्रेजेंटेशन किया गया। आर्किटेक्ट श्यामलाल सिंह ने महापौर रामगोपाल मोहले को पूरा प्लान बताया।
महापौर के सलाहकार राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि गंगा घाटों की सफाई अत्याधुनिक संसाधनों से लैस बोट करेंगी। यह सभी बोट सामने घाट से राजघाट के बीच निरंतर चक्रमण करती रहेंगी। सफाई के लिए तैयार किए गए डीपीआर में यह कोशिश की गई है कि काशी की पहचान के तौर पर चिह्नित प्रमुख स्थलों, उनके आसपास और उनकी तरफ जाने वाली गलियां और सड़कें चौबीस घंटे साफ-सुथरी नजर आएं।
धरोहरों के आसपास चौबीस घंटे सफाई व्यवस्था की मानीटरिंग के लिए आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसके अलावा मोबाइल वैन चलेगी, जिसमें टेलीफोन और इंटरनेट की व्यवस्था की जाएगी। इनका हेल्पलाइन नंबर भी जारी होगा। ये सभी कंट्रोल रूम से कनेक्ट होंगी। इससे शहर का कोई भी व्यक्ति कहीं से भी इन वैन पर संपर्क कर गंदगी के संबंध में सूचना दे सकता है।