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खबर का असर: भारत रत्न के स्मारक से हटी गंदगी और कूड़ेदान, राजेंद्र घाट पर 34 साल पुरानी मूर्ति की साफ-सफाई

Sun, 14 Aug 2022 04:07 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

देश के पहले राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्मारक स्थल पर चारों ओरकूड़े का अंबार लगा था। अमर उजाला में छपी खबर के बाद लोगों ने रविवार को स्मारक स्थल की साफ-सफाई की। 
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भारत रत्न डॉ.राजेंद्र प्रसाद के स्मारक की हुई साफ-सफाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के पहले राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के स्मारक स्थल से अमर उजाला में छपी खबर के बाद कूड़ा-गंदगी को हटा दिया गया। स्वागतम फाउंडेशन के सदस्यों ने  भारत रत्न की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर अंग वस्त्र और माल्यार्पण किया। रविवार को अमर उजाला में 'भारत रत्न के स्मारक बेहाल, जिम्मेदार मौन' शीर्षक से खबर छपी थी।

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स्वागतम फाउंडेशन के संयोजक अभिषेक शर्मा ने कहा कि नगर-निगम और प्रशासन की ओर से अनदेखी हो रही थी तो कुछ नगरवासियों के साथ उस विभूति की प्रतिमा के चारों ओर बरसों से जो कूड़े का अंबार लगा था, सब हटवा दिया गया और गंगा स्नान, माल्यार्पण आदि कर लोगों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है।
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1988 में हुआ था डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण
बता दें कि भारत रत्न की प्रतिमा के एक तरफ कूड़ा-गंदगी और दूसरी तरफ कूड़ेदान का ढेर लगा हुआ था। राजेंद्र प्रसाद घाट पर बने स्मारक की यह हालत समाज के हर वर्ग को परेशान कर रही थी, लेकिन जिम्मेदारों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी।

गंगा के 84 घाटों में प्रमुख राजेंद्र प्रसाद घाट का नाम ही प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के नाम पर पड़ा है। नौ जुलाई 1988 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने किया था। 

बदहाल है चौधरी चरण सिंह अंतरराज्यीय बस अड्डा

वाराणसी कैंट रोडवेज - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम से पहचान पाने वाले कैंट बस अड्डे पर यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। यहां हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक डीलक्स शौचालय का निर्माण किया गया, जिसपर अब ताला लटका रहता है। बस स्टेशन परिसर में यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त टेबल की सुविधा नहीं।
 
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डिजिटल के दौर में यहां ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को अपनी बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। यात्रियों के पीने के लिए साफ और आरओे के ठंडे पानी की व्यवस्था है ही नहीं। परिसर की सड़के खराब होने से यात्रियों के सफर की शुरुआत हिचकोले खाते हुए होती है। बारिश होने के बाद अक्सर यात्रियों को जल जमाव से आने जाने जाने में परेशानी होती है।
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