वाराणसी। वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन के पहले दिन भाषा और उसकी महत्ता पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि किसी भी भाषा के साथ छेड़छाड़ ठीक नहीं होता है। जो भाषा जिस रूप में बोली जाती है, उसको उसी रूप में सीखना चाहिए।
नैरेटिव ऑफ डायस्पोरा: वॉयसेस ऑफ मरिजिनालिटी एंड विजन ऑफ एक्साइल विषय पर कुलपति ने दूसरी जगहाें पर जाने पर होने वाली भाषायी समस्या और उसके समाधान के बारे में विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कॉलेज के जर्नल वसंत सहस्त्रधारा के दूसरे अंक के साथ ही अंग्रेजी विभाग द्वारा संकलित स्टडीज इन इंग्लिश लिटरेचर: अ कॉम्पेंडियम ऑफ कॉलोक्विम और डॉ. रचना पांडेय की बॉडी एंड स्पेस परफारमेंस पर लिखी पुस्तक का विमोचन किया। ऑकलैंड, कैलिफोर्निया के प्रो. कृवि आरतरो दाविला सांचेज ने स्पेनिश भाषा में अपनी कुछ कविताएं प्रस्तुत की और इसका हिंदी अनुवाद कालेज की राजनीति विभाग की डॉ. मनीषा मिश्रा ने पढ़ा। अतिथियों का स्वागत कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अलका सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रो. बृंदा, जे मेहता, पो.एपी बराट, कॉलेज के प्रबंधक एसएन दूबे, प्रो.पी कृष्णा के साथ ही डॉ. अंजना आदि मौजूद रहे।