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शिक्षा, कला, संगीत, अध्यात्म और साहित्य काशी के कण कण में

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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि काशी संपूर्ण भारतीय संस्कृति का सार तत्व अपने में समाहित किए हुए है। उत्तर प्रदेश को अगर जानना है तो काशी का अध्ययन आवश्यक है। काशी की जीवन परंपरा ने मानवीय मूल्यों के साथ अपने को शाश्वत किया है जिसमें बाबा विश्वनाथ, मां गंगा, मां अन्नपूर्णा, संकटमोचन, मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट संस्कृति और जीवन के यथार्थ को पूर्ण करते हैं।
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वह सोमवार को उत्तर प्रदेश दिवस पर उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में काशी की संस्कृति विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि सर्व विद्या, सर्व ज्ञान की राजधानी भारत में शिक्षा के प्राचीनतम केंद्र, विश्व प्रसिद्ध विद्वानों और उनके शास्त्रार्थ, महान विद्वानों, गुरुशिष्य परंपरा तथा प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पत्रकारिता आदि विशिष्ट है। छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय ने कहा कि काशी देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मान्य है। प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि काशी संस्कृत, संस्कृति, अध्यात्म, कला एवं संगीत के लिए विश्व में अपनी प्राचीनता के महत्व को स्थापित करती है। इस दौरान प्रो. रमेश प्रसाद, डॉ. रविशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
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