मोक्षदायिनी गंगा के घाट पर जलकुंभी का ग्रहण लग गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों पर जलकुंभियां जमा हो गई हैं। इससे जहां घाटों की सुंदरता खराब हो रही है, वहीं मुक्ति के घाट मणिकर्णिका पर शवदाह करने आए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
गंगा के जलस्तर में पिछले सप्ताह से बढ़ोतरी हो रही थी। जल के साथ ही बाहर से आने वाली गंदगी और जलकुंभी भी काशी के घाटों पर जमा हो गई है। मणिकर्णिका घाट पर रोजाना शवदाह करने आए लोगों को इससे परेशान होना पड़ता है। शवयात्री अंतिम क्रिया कर्म के दौरान स्नान से लेकर अन्य विधियों को कराने के दौरान संकट झेल रहे हैं। बृहस्पतिवार को तो कई शवयात्री मणिकर्णिका घाट पर गिरकर चुटहिल भी हो गए।
जौनपुर से आए रमेश ने बताया कि वह शव लेकर जैसे ही नीचे उतरे थे, उनका पांव जलकुंभी में ही फंस गया। यह तो शुक्र था कि लोगों ने हाथ पकड़ लिया वरना हादसा हो सकता था। नाविकों का कहना है कि नावों का संचालन बंद है। यह जलकुंभियां घाट किनारे खड़ी हमारी नावों में फंस जाएंगी, जिससे कई जलीय जीव भी नावों में घुस जाएंगे।
इससे उनकी नावों के खराब होने का भी खतरा है। शिवधनी केवट ने बताया कि 80 दिनों से नावों का संचालन बंद है। जलकुंभी के कारण कई जलीय जीवों का खतरा बढ़ा है। इससे घाटों की सुंदरता भी खराब हो रही है। लॉकडाउन के कारण गंगा में सफाई करने वाले भी नहीं आ रहे हैं।