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रहने के लिहाज से बेहतर हो रहा पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस, जानें पिछले कुछ सालों में कितना बदला शहर

Sat, 06 Mar 2021 02:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

जिक्र और फिक्र के चलते रहने के लिहाज से बनारस बेहतर हो रहा है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इज ऑफ लिविंग इंडेक्स यानी रहने के लिहाज से बेहतर शहरों की रैंकिंग 2020 जारी की। इसमें वाराणसी को 27वीं रैंक मिली है। बनारस, न केवल मंदिरों, बल्कि धार्मिक परंपराओं, घाटों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर गलियों के लिए भी जाना जाता है। शहर की आत्मा यहां की गलियों में बसती  है।
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बनारस शहर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिक्र और फिक्र के चलते रहने के लिहाज से बनारस बेहतर हो रहा है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इज ऑफ लिविंग इंडेक्स यानी रहने के लिहाज से बेहतर शहरों की रैंकिंग 2020 जारी की। इसमें वाराणसी को 27वीं रैंक मिली है। बनारस, न केवल मंदिरों, बल्कि धार्मिक परंपराओं, घाटों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर गलियों के लिए भी जाना जाता है। शहर की आत्मा यहां की गलियों में बसती  है। इसलिए इसे गलियों का शहर भी कहते हैं। पुरानी होने के कारण गलियां बदहाल हो गई थीं।

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सीवेज, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी ठीक नहीं थी। इसके मद्देनजर वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड से बेहतर काम हो रहा है। स्मार्ट सिटी के तकनीकी विशेषज्ञ वासुदेवन ने बताया कि कई बिंदुओं पर रैंकिंग दी गई है। इसमें केवल सड़क, बिजली, पानी ही नहीं, बल्कि यहां रहने वालों के जीवन स्तर में हो रहा बदलाव भी इसका आधार है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत आध्यात्मिक नगरी में कई स्तरों पर काम हो रहा है। यहां सड़कें बेहतर हुई हैं और घाटों की स्थिति भी पहले के मुक़ाबले बेहतर दिखती है।

स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के कारण वाराणसी में बदलाव की बयार बह रही है। नगर निगम मुख्यालय के बगल में भव्य कन्वेंशन सेंटर रुद्राक्ष बन रहा है। बदहाल सरकारी स्कूल स्मार्ट हो रहे हैं। मालवीय मार्केट, कनॉट प्लेस की तरह आकार ले रहा है। गंगा किनारे की गलियों में मूलभूत सुविधाएं विश्व स्तरीय हो रही हैं। फ्लाइओवर, आरओबी, फोरलेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। इससे निश्चित तौर पर शहर तेज गति से बदल रहा है। आने वाले दिनों में रैंकिंग और बेहतर होगी।

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इन बिंदुओं पर हुआ सर्वेक्षण
- शहर रहने के लिए कितना सुगम है
- शिक्षा की गुणवत्ता
- स्वास्थ्य सेवाओं की कैसी है व्यवस्था
- आवासीय सुविधाएं कैसी हैं
- हवा की शुद्धता
- शहर की साफ सफाई की स्थिति से कितने संतुष्ट हैं
- आपके पास पड़ोस से कूड़ा उठाने की व्यवस्था कितनी अच्छी है
- पीने के पानी की स्थिति
- जलभराव की समस्या
- शहर में यात्रा करना कितना सुरक्षित और आसान है
- शहर रहने के लिए कितना सुरक्षित व महफूज है
- आपातकालीन सेवाएं कितनी अच्छी है
- महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगह कितनी सुरक्षित है
- मनोरंजन की सुविधाओं से कितने संतुष्ट हैं
- बिजली आपूर्ति
- बैंकिंग, बीमा-एटीएम

तीन साल में बढ़ गए 25000 मकान
वर्ष 2018 में बनारस में एक लाख 80 हजार मकान थे, जिनके पीले कार्ड जारी हुए थे। अब नगर निगम के रिकॉर्ड में 2.05 लाख भवन हो गए हैं। 3 साल के भीतर 25000 मकान बढ़े हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां रहने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। खासकर बिहार से लोग यहां आकर बसे हैं। पूर्वांचल के कई जिलों से लोग यहां आकर बस रहे हैं। यहां की सड़क, जल और वायु मार्ग की सुविधाएं बेहतर हुई हैं।
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33 से 27वें स्थान पर वाराणसी 
ईज ऑफ लिविंग सर्वे में वाराणसी का पहले 33 वां स्थान था। इस बार रैंकिंग बेहतर होकर 27 वां है। पहली बार 2018 में शहरों की रैंकिंग की गई थी। दूसरी बार 2020 में शहरों की रैंकिंग की गई। इस कैटगरी में मुख्य रूप से तीन पिलर्स हैं। पहला पिलर्स रहने की गुणवत्ता, जिसकी रैंकिंग के लिए 35 फीसदी अंक रखे गए थे। दूसरा पिलर आर्थिक योग्यता, इसके लिए 15 फीसदी अंक और तीसरा विकास की स्थिरता कैसी है, इसके लिए 20 फीसदी अंक तय किए गए। बाकी 30 फीसदी अंक लोगों के बीच सर्वे के लिए तय थे। जबकि 49 इंडिकेशंस थे, जिनके आधार पर इनकी रैंकिंग की गई।

पहले से अब कई सुविधाएं बेहतर हुई हैं। इनमें सबसे बड़ी सुविधा पाइपलाइन के जरिए गैस घरों को जा रही है। इसके अलावा बिजली व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। यातायात के साधन बेहतर हुए हैं। जाम की समस्या कम हुई है। इस लिहाज से बनारस अन्य शहरों की अपेक्षा पहले से बेहतर पॉजिशन पर है। - अनुपम रघुवंशी कैरियर काउंसलर

ईज आफ लिविंग के मामले में बनारस में कई बदलाव हुए हैं। पहले यहां घंटों जाम लगता था लेकिन अब जाम लगता है तो यह उम्मीद रहती है कि कुछ ही देर में निजात मिल जाएगी। अतिक्रमण के चलते जो सड़कें खो गई थीं, वह अब दिखने लगी हैं। लोगों के हाथ में मोबाइल फोन है। लोग मोबाइल से ही शिकायतें दर्ज करा रहे हैं लेकिन अभी और भी चीजों को बेहतर करने की आवश्यकता है। - जय प्रधवानीनी सीए

पहले से कई चीजें बेहतर हुई हैं। लेकिन अभी और बेहतर करने की आवश्यकता है। यातायात सफाई बिजली आदि की दिशा में बेहतर काम हुए हैं। लेकिन अभी बेहतर गवर्नेंस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम व अन्य चीजों की आवश्यकता है। जिस तरह से शहर में काम हो रहा है, आने वाले दिनों में और बेहतर स्थिति कि हम लोग उम्मीद करते हैं। - श्याम लाल सिंह, वास्तुविद
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