वाराणसी जिले में साल दर साल पौधे लगाने का जो लक्ष्य रखा गया है, उसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। शासन के आदेश के बाद वन विभाग के साथ ही पर्यावरण, ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज सहित अन्य विभागों को लक्ष्य दिया जाता है। इसमें वर्ष 2020-21 में जिले में 1484015 पौधे लगाए गए थे। 2021-22 यह संख्या बढ़कर 1780819 तक पहुंच गई है। इसके बाद 2022-23 में जिले में 2077618 का लक्ष्य रखा गया है।
ज्ञान जन से सींचते हरियाली
डॉ. आनंद प्रभा निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य हैं। उन्होंने अपने पर्यावरण प्रेम के जरिये विद्यालय को हरा-भरा बना दिया है। उनका ये प्रयास अभी थमा नहीं है, बल्कि अब वो इस प्रयास में अपने विद्यालय के बच्चों को भी जोड़ रही हैं। गुलाब की कई अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाने के साथ फलदार पौधे, नीम, लेमन ग्रास लगाने के साथ ऑक्सीजन बढ़ाने वाले पौधे लगाए हैं।
घर के प्लास्टिक को एकत्रित कर इको ब्रिक बनाती भारती मिश्रा व अपेक्षा मिश्रा
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अपने धरा को हरा भरा बनाने के लिए काशी की महिलाएं अपनी अहम भूमिका निभा रही है। इसके लिए ये महिलाएं अपने घर का प्लास्टिक इकट्ठा कर उनसे इको ब्रिक बना रही है। नगवां निवासी भारती मिश्रा, सुनीति शुक्ला, वैदेही, सहित कई अन्य महिलाएं इसमें शामिल हैं। महिलाओं ने अपने द्वारा तैयार इको ब्रिक अपने छत पर गमलों को रखने में प्रयोग किया है।
बीते 10 साल से जैविक खेती कर अनाज और सब्जी उगा रहा हूं। रसायन मुक्त खेती से उत्पादन तो अच्छा हो ही रहा है, साथ इसका फायदा पर्यावरण और स्वास्थ्य को भी हो रहा है। रसायन के प्रयोग से जहरीले अनाज ही नहीं मिट्टी और भूजल भी प्रभावित होते हैं। इसमें लागत भी अधिक आती है। - हरीशंकर सिंह, किसान, रामपुर, पिंडरा
मैं बीते 12 साल से गोबर और हरी खाद के प्रयोग से सब्जी और अनाज की खेती कर रहा हूं। प्रमाण पत्र मिलने के बाद अपने ग्राम पंचायत के कई गांव के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया, जिसमें कई किसान जैविक विधि से खेती कर पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य सुधार में योगदान दे रहे हैं। - ओम प्रकाश पटेल, किसान, फूलपुर, पिंडरा