संविदा पर 1.75 पैसे और निजी में 5 रुपये प्रति किमी भुगतान
रोडवेज की ओर से संविदा के चालक और परिचालक को 1.75 पैसे प्रति किलोमीटर के दर से भुगतान होता है। मगर, डिपो में आने के बाद बस देरी से मिलना और फिर रास्ते में ब्रेकडाउन के दौरान होने वाली असुविधाओं के चलते ये नौकरी छोड़ना ही मुनासिब समझते हैं।
चालकों के अनुसार सुबह डिपो में आए तो फिर शाम को बस की स्टेयरिंग थामनी पड़ती है। जितना किमी चलेंगे, उतना वेतन बनता है। लंबी रूट की बसें जल्दी मिलती नहीं है।
वहीं, एक समस्या यह भी है कि यदि शाम को गोरखपुर रूट पर गए और दोहरीघाट के पास बस खराब हो गई तो फिर बस छोड़कर हटना नहीं है। ऐसे में एक से दो दिन का समय लगना तय होता है। बाहर में ट्रक या निजी बस चलाने पर चार से पांच रुपये प्रति किमी पैसा मिलता है। ऐसे में वह ज्यादा अच्छा समझ में आता है।
आउटसोर्सिंग पर परिचालक, एक-दो माह बाद ही करते हैं पलायन
रोडवेज में आउटसोर्सिंग पर परिचालकों की भी भर्ती होती है। संबंधित एजेंसी उन्हें आठ से दस हजार रुपये महीने पर नौकरी देती है। लेकिन पूरा वेतन उन्हें मिलता नहीं है। ऐसे में वह भी एक से दो माह बाद ही नौकरी छोड़ देते हैं।
बोले अधिकारी
संविदा पर चालकों और परिचालकों की समय-समय पर भर्ती की जाती है। कुछ ऐसे भी हैं जो प्रशिक्षण लेकर आते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद ही तरह-तरह के समस्या बताकर घर बैठ जाते हैं। - गौरव वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीएसआरटीसी वाराणसी