संत गुरु रविदास की जयंती माघी पूर्णिमा पर उनके जन्मस्थान सीर गोवर्धन गांव में देश-दुनिया के रविदासियों के जमावड़े को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। छुआछूत, ऊंच-नीच का भेद मिटाने का संदेश देने वाले संत के अनुयायी गांव में टेंट-तंबुओं से बेगमपुरा नगर बसाने में जुट गए हैं।
अबतक 70 से अधिक पंडाल तैयार किए जा चुके हैं। लंगर के लिए पंजाब से चार ट्रक रसद भी आ गया है। 639वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन का कार्यक्रम तय होने से प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। 12 फरवरी से सेवादारों की टोलियां जिम्मेदारी संभालने के लिए आने लगेंगी।
मानवता से भरे बेगमपुरा नगर की परिकल्पना करने वाले संत रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धन गांव में दुनिया के 20 से अधिक देशों के अनुयायी काशी पहुंचेंगे। फिलहाल वहां पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 25 राज्यों के अनुयायियों के पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
संत रविदास जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंधक ज्ञानदास ने शुक्रवार को बताया कि दो सौ से अधिक होटलों की बुकिंग हो चुकी है। पंडालों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। पंजाब से लंगर के लिए दो ट्रक गेहूं, एक-एक ट्रक चावल, दाल सीर गोवर्धन पहुंच गया है। सौ हलवाई लंगर की व्यवस्था संभालेंगे, जबकि पांच हजार सेवादार मंदिर से पंडालों तक की निगरानी में लगाए जाएंगे।