सुप्रसिद्ध साहित्यकार और हिंदी नवगीत के प्रतिष्ठापक डॉ. शंभुनाथ सिंह की 35वीं पुण्यतिथि पर स्मृति संध्या एवं काव्यांजलि समारोह हुआ। साहित्यकारों और कवियों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए हिंदी साहित्य में उनके योगदान पर चर्चा की।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने डॉ. शंभुनाथ सिंह को भारतीय ज्ञान परंपरा का साहित्य साधक बताया। कहा कि उनकी रचनाएं मूल्यहीनता के दौर में आशा और विश्वास जगाती हैं। साकेत महाविद्यालय मुंबई के पूर्व प्राचार्य प्रो. इंदीवर ने कहा कि शंभुनाथ सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा में व्यापक गद्य रचना की। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा में व्यापक गद्य लेखन किया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रामसुधार सिंह ने कहा कि डॉ. शंभुनाथ सिंह की साहित्यिक प्रतिभा काशी में विकसित हुई। उन्होंने नामवर सिंह और केदारनाथ सिंह जैसे साहित्यकारों को भी प्रेरित किया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि हीरालाल मिश्र मधुकर ने की। समारोह में 60 से ज्यादा कवि और विद्वान शामिल हुए। कवियों ने रचनाओं का पाठ किया। संचालन गौतम अरोड़ा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के महासचिव राजीव कुमार सिंह ने किया।