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Banaras Lit Fest: डॉ. दीपक मधोक बोले, एक जेन-जी छात्रा के सवाल ने शुरू करा दिया बनारस लिट फेस्ट

Mon, 02 Feb 2026 04:10 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: डॉ. दीपक मधोक ने कहा कि उनके स्कूल की जेन-जी छात्रा के सवाल के चलते बनारस लिट फेस्ट को कराने का फैसला लिया गया। छात्रा ने पूछा कि बनारस जयपुर से भी प्राचीन है लेकिन यहां पर लिट फेस्ट क्यों नहीं।
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बनारस लिट फेस्ट में मौजूद दर्शक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में रविवार को ज्ञान गंगा मंच पर फेस्टिवल के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक और सचिव बृजेश सिंह ने पंकज भार्गव के साथ संवाद किया। डॉ. दीपक मधोक ने कहा कि उनके स्कूल की जेन-जी छात्रा के सवाल के चलते इस फेस्ट को कराने का फैसला लिया गया। जयपुर से विजिट कर लौटी छात्रा ने पूछा कि बनारस जयपुर से भी प्राचीन है लेकिन यहां पर लिट फेस्ट क्यों नहीं। मार्क ट्वेन ने 100 साल पहले ही कह दिया था कि काशी इतिहास-संस्कृति से भी प्राचीन है तो फिर यहां पर क्यों नहीं होता। डॉ. मधोक ने कहा कि इसके बाद लगा कि बनारस की जेन-जी भारत के साहित्य और संस्कृति को जीना चाहता है। 

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ऑस्कर-कांस की तरह से होगा आयोजन 
बीएलएफ के सचिव बृजेश सिंह ने कहा कि काशीवासियों का ये मोमेंट एक सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है। 2030 तक ऑस्कर और कांस जैसे आयोजनों के समकक्ष पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

एक साथ जुड़े युवा, तकनीक और राष्ट्र-निर्माण
बनारस लिट फेस्ट में ज्ञान गंगा मंच पर 'यूथ शेपिंग नेशन इन एन एआई-पावर्ड वर्ल्ड' विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें युवा, तकनीक और राष्ट्र-निर्माण को एक साथ जोड़ा गया। एआई युग में भारत के युवाओं को लेकर पारिजात चक्रवर्ती, अभिजीत राय, कश्यप कोंपेला और सुबोर्नो इसाक बारी ने चर्चा की। चर्चा का संचालन प्रो. धवल मेहता ने किया। मुख्य अतिथि लेखक अनिरुद्ध मिश्रा ने कहा कि राष्ट्र के भविष्य के लिए कोर्स केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। युवाओं के लिए तीन मूल स्तंभ अनिवार्य हैं स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ दृष्टिकोण। सभी पैनलिस्टों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि एआई और तकनीक युवाओं के लिए केवल अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी लेकर आई है। 

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मंत्रियों ने किया सम्मानित, सूफी गायकी पर झूमे दर्शक

बनारस लिट फेस्ट में प्रदेश के मंत्री रविंद्र जायसवाल और आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने देश के प्रमुख उद्यमियों को सम्मानित किया और कार्यक्रम में आए लोगों को बनारस और साहित्य के बीच का संबंध बताया। शाम को सूफी संगीत की प्रस्तुतियों के दौरान दरबार हॉल तालियों की गड़गड़हाट से गूंजता रहा। रूह ए विरासत बैंड की ओर से काली-काली जुल्फों, छाप तिलक सहित नुसरत फतेह अली खां के कई नग्मों को सुनाकर लोगों को अपने वश में कर लिया।  

महिला केंद्रित साहित्य समाज में समझ-समानता को करता है मजबूत
बनारस लिट फेस्ट पुस्तक चर्चा सत्र ‘बिजी वुमेन’ में लेखिका सिंजिनी कुमान और लेखक-पत्रकार सौरभ चक्रवर्ती ने संवाद किया। सिंजिनी कुमान ने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अमेरिका से शिक्षा प्राप्त की और एक पेशेवर क्षेत्र में कार्य किया। वह लिखना चाहती हैं, लेकिन सही समय का इंतजार करती रहीं। वाराणसी, लखनऊ, मुंबई, जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों ने उन्हें नए अनुभव और दृष्टिकोण दिए। किताब घुमक्कड़ औरत पर कहा कि यह किताब महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। महिला-केंद्रित साहित्य, समाज में समझ और समानता को मजबूत करता है। 

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यूपी ने 35 साल पहले जीता सुब्रतो कप, मगर देश को मिला सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया
आज से 35 साल पहले सुब्रतो कप का विजेता तो यूपी हुआ था, मगर उस खेल में बेस्ट प्लेयर बनकर पहली बार बाइचुंग भूटिया को चयनकर्ताओं ने नोटिस किया और वो दुनिया के सामने आए। ये जानकारी रविवार को बीएलएफ में प्रख्यात फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया और प्रदीप मधोक के बीच संवाद के बाद सामने आई। बाइचुंग ने कहा कि नब्बे के दशक में भारत सरकार ने साई स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की शुरुआत की थी। उस समय पहली बार स्कॉलरशिप लेकर स्कूल गया। 1992 में दिल्ली में सुब्रतो कप खेला लेकिन विजेता यूपी की टीम बनी। मगर सुब्रतो कप ने मुझे अंडर 16 खेलने का मौका दिया और उसी टाइम मुझे नोटिस किया गया। उसी के बाद से मेरी फुटबॉल की यात्रा शुरू हुई। बाइचुंग ने कहा कि फुटबॉलर बनने के पीछे पूर्वाेत्तर का वातावरण है। उस दौर में यूपी की फुटबॉल टीम बहुत मजबूत और चर्चित हुआ करती थी। लेकिन नॉर्थ ईस्ट खासकर सिक्किम में दो चीजें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं संगीत और फुटबॉल।

फुटबॉल के अलावा कुछ भी एंजॉय नहीं किया

बाइचुंग भूटिया ने आगे कहा कि फुटबॉल के अलावा उन्हें जीवन में कुछ और कभी एंजॉय ही नहीं किया। मैदान के बाहर की दुनिया मायने नहीं रखती थी। टीवी शो कपिल शर्मा शो पर अपनी कहानी साझा करना और दूसरों की जीवन यात्राएं सुनना उनके लिए प्रेरणादायी अनुभव रहा। भारतीय बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष समीर थापड़ ने इस खेल को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया।

तब न पीएम मिलते थे न विधायक
प्रदीप मधोक ने कहा कि बाइचुंग भूटिया ने ऐसे समय में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाया, जब भारत में गिने-चुने स्पोर्ट्स चैनल थे और खेल को पर्याप्त मंच नहीं मिलता था। उस दौर में जीतकर आने वाले खिलाड़ियों से मिलने न प्रधानमंत्री आते थे, न ही शहर का विधायक। ऐसे हालात में खेल को आगे बढ़ाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
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सोशल मीडिया से दूर रहे खिलाड़ी

बाइचुंग भूटिया ने कहा कि वे खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया के दबाव वाले दौर में खेल नहीं खेला। आज के खिलाड़ियों पर अपेक्षाओं और आलोचनाओं का पहले से ज्यादा दबाव है। खिलाड़ियों को सोशल से दूर रहने की जरूरत है। बाइचुंग भूटिया ने अपने फिटनेस का राज साझा करते हुए युवाओं को फिट और अनुशासित रहने के व्यावहारिक टिप्स भी दिए। इस सत्र से युवाओं को बताया गया कि समर्पण, अनुशासन और जुनून से कोई भी खेल इतिहास रच सकता है।

कॉमेडियन संदीप ने बंद कराया लाइव प्रसारण, कहा- जेल भिजवाओगे क्या
बनारस लिट् फेस्ट में बरेली के स्टैंड-अप कॉमेडियन संदीप शर्मा ने अपनी प्रस्तुति देने से पहले मोबाइल रिकॉर्डिंग और लाइव प्रसारण बंद करा दिया। संदीप शर्मा ने रॉ-वन गाने पर रॉकस्टार टाइप इंट्री ली। माइक हाथ में लेते ही मजाकिया अंदाज में कहा कि मत करो रिकॉर्ड, इस उम्र में जेल में अच्छा लगूंगा मैं। मत करो रिकॉर्ड, क्योंकि कॉमेडियन के मुंह से कुछ भी निकला जाता है और बाद में ये भी नहीं कह पाऊंगा कि ये एआई है। इसके बाद संदीप ने लाइव प्रस्तुति भी बंद करवा दी। कहा कि वीडियो बनाआगे तो शास्त्रीय संगीत टाइप कॉमेडी करूंगा। संदीप शर्मा ने दरबार हॉल में हर रोज के अनुभवों को बड़े चुटीले अंदाज में सुनाया। सामाजिक विसंगतियों और युवाओं की सोच पर खूब व्यंग्य कसे। इसके बाद बनारस की गलियों, ट्रैफिक की अव्यवस्था और पारिवारिक रिश्तों दिक्कतों को ठिठोली मारकर बयां किया। हर पंचलाइन पर तालियों की गूंज थी।
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