संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि मां गंगा काशीवासियों की बल्कि पूरे देश की आस्था का स्वरूप हैं। काशी में होने वाली मां गंगा की आरती से काशी के पंडा, पुरोहित, नाविकों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की जीविका का स्त्रोत है। जहां तक घाट के स्वामित्व का प्रश्न है तो वह सैकड़ों वर्षों से घाट के पुरोहितों के अधिकार में है और सर्वदा उनके अधिकार में ही रहेगा। इसका साक्ष्य देने की कोई आवश्कता ही नहीं है।
गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमन दुबे बाबू महाराज ने अनुरोध किया कि इस समस्या का निवारण एकजुटता में है न की अकेले चलने में। बाढ़ के दौरान 32 सालों से मां गंगा की पारंपरिक रूप से आरती निरंतर हो रही है। आरती में हस्तक्षेप करना सनातनियों की भावना को आहत करने जैसा है। इस दौरान गंगा सेवा निधि के सुशांत मिश्र, श्याम लाल सिंह, किशोरी रमन दूबे बाबू महाराज, केशव जालान, प्रेम मिश्र, अरूण मिश्र उपस्थित रहे।