केंद्रीय देव दीपावली समिति के अध्यक्ष वागीश मिश्र ने बताया कि सामनेघाट से आदिकेशव घाट के बीच कई घाटों पर स्थितियां बेहद खराब है। कुछ घाट तो ऐसे हैं जहां से पैदल चलना मुश्किल है। कई घाटों पर खुलेआम सीवर बहाया जा रहा है। देव दीपावली तक तो साफ-सफाई तेजी से हुई लेकिन उसके बाद स्थितियां सुस्त हो गई हैं।
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गंगा में ये है प्रतिबंधित
- सीवर, मलजल प्रवाह
- साबुन लगाकर स्नान, कपड़ा धोना
- ठोस अपशिष्ट व कचड़ा फेंकना
- शव के अवशेष या शव का प्रवाह
- मृत जानवरों के शव को फेंकना
- डीजल नाव का संचालन
काशी के पांच घाटों से ग्राउंड रिपोर्ट
- आदिकेशव घाट : पशुओं के झुंड को पानी में नहलाया जा रहा था, कुछ लोग साबुन लगाकर नहा रहे थे।
- सिंधिया घाट और भोसले घाट : लोग साबुन लगाकर स्नान करते नजर आए।
- राम घाट : गंगा में एक मृत पशु तराया हुआ मिला और उसकी बदबू से आसपास के लोग परेशान रहे।
- पंचगंगा घाट : शिव मंदिर के पास लोग खुले में शौच करते हुए नजर आए।
- ललिता घाट : गंगा द्वार से नीचे मृत पशु पड़े हुए थे।
गंगा में साबुन लगाकर स्नान करना, जानवरों या मनुष्य के शव को बहाना, सीवर या मलजल का प्रवाह करना प्रतिबंधित है। इसको रोकना बेहद जरूरी है। इसके कारण गंगा के जल में प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा और जलीय जीवों पर भी संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। -प्रो. बीडी त्रिपाठी, नदी विज्ञानी