सांस लेने में कठिनाई या अन्य जटिलताओं के कारण मरीजों की मृत्यु हो जाती है। एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की डॉ. अमृता का कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं के लिए बहुत उच्च स्तर की सटीकता की आवश्यकता होती है और थोड़ी सी भी असावधानी मरीज के जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इस मामले में आठ साल से सांस की नली में पड़े सिक्के को निकालने के लिए एडवांस्ड रिगीद ब्रोंकोस्कोप का उपयोग किया गया। सर्जरी में त्रिवेन्द्र त्यागी, आनंद कुमार , ओम प्रकाश, बैजनाथ पाल , विकास एवं संजय ने भी अहम भूमिका निभाई।
आईएमएस बीएचयू में है सिक्का निकालने की सुविधा
सर्जरी करने वाली टीम में शामिल कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. रत्नेश ने बताया कि वयस्कों की सांस की नली से सिक्का या अन्य धातु निकालने की सुविधा पूर्वी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों मे केवल आईएमएस, बीएचयू में ही उपलब्ध है। वयस्कों में यदि कोई व्यक्ति मुंह में कुछ भी रखकर सोता है या शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में अर्ध-चेतन अवस्था में है तो सांस की नली की समस्या बढ़ जाती है।
दस साल से नली में फंसी चाबी को भी निकाला था
प्रो. सिद्धार्थ लाखोटिया का कहना है कि इसके पहले भी ऐसे मामलों में बीएचयू अस्पताल में अपनी टीम के साथ सर्जरी कर चुके हैं। मरीज भी पूरी तरह स्वस्थ है। उस मामले में अलमारी की चाबी 10 साल से सांस की नली में ही पड़ी हुई थी। फिर उसे सफलतापूर्वक निकाल दिया गया था।