एक प्रोफेसर ने बिहार के जाति प्रमाणपत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश के आरक्षित वर्ग में नौकरी हासिल की। वह असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर बन चुके हैं। जबकि नियमानुसार दूसरे प्रदेश के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी की नियुक्ति दूसरे राज्य के विश्वविद्यालय में सामान्य के पद पर ही हो सकती है।
वहीं, एक विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर के पास संबंधित विषय में स्नातक डिग्री ही नहीं है और वह अपनी पहुंच और गलत तरीकों से नियुक्त हो गए। कई ऐसे विभाग हैं, जिनमें मानकों की अनदेखी कर असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर बन बैठे हैं। जांच में गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद चर्चा चल रही है कि अब कई लोग नपेंगे।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों की गलत नियुक्ति को लेकर लंबे समय से आवाज उठती रही है। राजभवन तक ऐसे मामले पहुंचते रहे हैं, लेकिन लीपापोती होती रही। जांच टीम और विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वह इस मामले पर फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं। जांच रिपोर्ट तैयार है और यह प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।