भदोही के खड़गपुर गांव निवासी प्रेमशंकर ने कोर्ट में अपने अधिवक्ता बिजय सिंह के माध्यम से आवेदन पत्र दिया था। आवेदन पत्र में कहा गया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा एक जनवरी 1989 को पीड़ित की लगभग 26 बिस्वा जमीन अधिग्रहित की गई थी। आरोप लगाया कि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी द्वारा अधिग्रहीत जमीन की कीमत बाजार दर से कम निर्धारित की जाने लगी तो भूमि स्वामी संतुष्ट नहीं हुआ।
उसने अदालत में मुकदमा दाखिल किया। अदालत ने प्रेमशंकर को 15 हजार रुपये प्रति बिस्वा की दर से मुआवजे के कुल चार लाख 99 हजार रुपये देने का आदेश जिला प्रशासन को दिया। बाद में विभाग द्वारा समय-समय पर कुछ ही धनराशि दी गई और बाकी का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद प्रेमशंकर ने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने ब्याज सहित बकाया नौ लाख 27 हजार रुपये प्रेमशंकर को देने का आदेश दिया। इस आदेश के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में न्यायालय द्वारा कई अवसर दिए जाने के बाद भी किसान को मुआवजे की धनराशि नहीं मिली। इसके बाद अदालत ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए भदोही के जिलाधिकारी और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को तलब किया है।