अब ट्रेन चालकों को रेल इंजन में ही टॉयलेट की सुविधा मिल सकेगी। डीरेका ने साल भर पहले की गई रेल मंत्री सुरेश प्रभु की इस परिकल्पना को मूर्त रूप दे दिया है। उसने टॉयलेट सुविधा युक्त रेल इंजन बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है। बुधवार को डीरेका के महाप्रबंधक अशोक कुमार हरित ने पहले शौचालय युक्त रेल इंजन ‘डुएल कैब डब्ल्यूडीजीडी4डी’ को दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजा। 4500 उच्च अश्वशक्ति वाले इस इंजन का रेलवे के उच्चाधिकारी निरीक्षण करेंगे। उसके बाद इसे नियमित सेवा में ले लिया जाएगा।
केवल 250 मिलीलीटर खर्च होगा पानी
‘डुएल कैब डब्ल्यूडीजीडी4डी’ की टॉयलेट केबिन में वेस्टर्न टाइप कमोड, वॉश बेसिन आदि सुविधाएं प्रदान की गई हैं। इस टॉयलेट में एक बार फ्लश के लिए केवल 250 मिलीलीटर पानी खर्च होता है। पुराने डिजाइन के शौचालय में एक बार फ्लश के लिए लगभग 10 लीटर पानी व्यय होता है। साथ ही इस शौचालय में बायो-डायजेस्टर लगा होने के कारण अशोधित मानव अपशिष्ट रेल लाइन पर नहीं गिरेगा। शौचालय में प्रयोग के लिए 300 लीटर क्षमता का एक वाटर टैंक भी लगा है।
रेल इंजन दौड़ेगा तो नही खुलेगा दरवाजा
यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा और संरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। यही कारण है कि रेल इंजन जब गतिशील अवस्था में होगा तो शौचालय का दरवाजा नहीं खुलेगा। रेल इंजन के ठहरे होने या फिर ब्रेक प्रयुक्त होने की स्थिति में ही टॉयलेट का दरवाजा खुल पाएगा। वहीं दूसरी ओर टॉयलेट का प्रयोग होने की स्थिति में रेल इंजन आगे नहीं बढ़ पाएगा। साथ ही, शौचालय प्रयोग की अवस्था में कंट्रोल डेस्क के एलसीडी डिस्प्ले पर ऑडियो-विजुअल अलर्ट भी प्रदर्शित होगा। इस रेल इंजन में दो मोटर ड्रिवेन ऑयल फ्री कंप्रेसर भी लगाए गए हैं। अभी तक रेल इंजनों में टॉयेलट की सुविधा न होने से ट्रेन चालकों को काफी परेशानी होती है। स्टेशनों पर या फिर कहीं ट्रेनों के रुकने की स्थिति में बाहर जाना पड़ता है।