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Diwali 2020: दीपों का महापर्व शुरू, घर-घर होगा महालक्ष्मी का आह्वान, जानिए कब है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

Fri, 13 Nov 2020 03:44 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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मलदहिया स्थित फूल मंडी में फूल मालाओं की खरीदारी करने को उमड़ी लोगों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी और गणेश के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। धनतेरस के साथ ही दीपों के महापर्व की शुरूआत हो चुकी है। मां अन्नपूर्णा से अन्न धन का आशीष पाकर श्रद्धालु अब घर-घर महालक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां कर रहे हैं। शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी का आह्वान करके घरों की चौखट से गंगा घाट तक दीप रौशन होंगे।

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काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष 14 नवंबर को अमावस्या दिन में 9 बजकर 49 मिनट से लग रही है जो प्रदोष काल में मिल रही है। दूसरे दिन 15 नवंबर को अमावस्या दिन में 11 बजकर 27 मिनट तक है, लेकिन प्रदोष काल में नहीं मिल रही है। इसलिए दीपावली 14 नवंबर को ही मनाई जाएगी।

गजाभिषिक्त लक्ष्मी की आराधना से मिलती है सिद्धि
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दीपावली में गजाभिषिक्त लक्ष्मी की आराधना से इष्ट सिद्धि होती है। वास्तुशास्त्र के ग्रन्थों में पूजा के लिए गजाभिषिक्त लक्ष्मी की प्रतिमा बनवाकर घर या देवालय में पूजन करने का विधान किया गया है। यह प्रतिमा 11 अंगुल से कम होनी चाहिए।
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कमल के आसन पर विराजित और दोनों ही ओर हाथियों द्वारा जलाभिषेक वाली निश्चला लक्ष्मी की पूजा करने से घर में स्थायी वैभव की प्रतिष्ठा होती है। इसके लिए आगमोक्त विधान को स्वीकार किया जाना चाहिए। लक्ष्मी गायत्री मंत्र का निरंतर जाप भी इष्टप्रद है। देवी भागवत में कहा गया है कि कमलासन पर विराजित लक्ष्मी की पूजा से इन्द्र ने देवाधिराज होने का गौरव प्राप्त किया था।

दिवाली 2020: बाजार में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
मिल रहा है अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि धर्म शास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्व पूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए होता है। इस साल अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल प्राप्त हो रहा है। महानिशीथ काल की पूजा मध्यरात्रि 12:40 से 2 बजे के मध्य की जा सकती है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • प्रदोष काल शाम 05:19 से 07: 53 बजे तक रहेगा।
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  • पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन में 06: 47 बजे से लेकर 09: 04 तक
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  • कुम्भ स्थिर लग्न दिन में 12:57 से 2: 28 तक
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  • वृष स्थिर लग्न सायं 5:33 से 7:29 तक विद्यमान रहेगा।  स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
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