पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सुग्रीव राम का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने दोनों पक्ष को बुलाया था लेकिन लहरतारा को जन्मस्थली बताने वाले पक्ष के प्रभु प्रसाद ही आए थे और उन्होंने 25 पुराने लेख उपलब्ध कराए। इसमें माडुर नगर को संत की जन्मस्थली और सीरगोवर्धनपुर को कर्मस्थली बताया गया है।
साक्ष्यों की जांच के बाद ही पीडब्ल्यूडी ने वहां जन्मस्थली का बोर्ड लगवा दिया है। सीरगोवर्धनपुर स्थित संत रविदास चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े पक्षों का कहना है कि हमने पुलिस से इस मामले में शिकायत करके उक्त बोर्ड हटवाने का अनुरोध किया है।