बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की सुविधा के लिए लगे डिस्पले बोर्ड शोपीस बनकर रह गए हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। एक ओर लोगों को ओपीडी में पर्चा जमा करने के बाद सही जानकारी नहीं मिल पाती है। वहीं, ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के लिए भी नोकझोंक हो रही है। डिस्पले बोर्ड पर कु छ दिन तक तो ओपीडी में पर्चा जमा करने के बाद नंबर दिखा और उसी नंबर से मरीज अंदर डॉक्टर को दिखाने जाते थे, लेकिन इस समय यह बंद पड़ा है। ओपीडी हाल में ऑन्कोलॉजी, सर्जरी, चर्म रोग विभाग के सामने टीवी स्क्रीन बंद होने से पर्चा जमा करने के बाद लोगों को अपनी बारी की जानकारी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
ओपीडी में पर्चे को लेकर होती है मारपीट
ओपीडी में पर्चा जमा करने के बाद डॉक्टर को दिखाने को लेकर मारपीट भी होती है। पिछले दिनों गैस्ट्रोलॉजी विभाग में भी परिजन को दिखाने गए एक छात्र ने पर्चा जमा करने के बाद उसे ऊपर नीचे करने का आरोप लगाया था। इसमें कर्मचारी और छात्रों के बीच मारपीट भी हुई थी। इस तरह की समस्या आए दिन सामने आती है। अगर डिस्प्ले बोर्ड चलता तो इस तरह की समस्या नहीं आती है।
दुश्वारियां बरकरार, बच्चों को बेड का इंतजार
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में बेड की कमी से होने वाली दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भले ही अस्पताल प्रशासन की ओर से डेंगू सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में 30-30 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बना दिया गया है, लेकिन अभी भी इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज मजबूरी है। शनिवार दोपहर 2 बजे बेड नंबर पर 25 पर दो बच्चे भर्ती थे इसके अलावा बेड नंबर पर 16 पर भी दो बच्चों को लिटाया गया था।