इस उपलब्धि के लिए एसपी सुभाष चंद्र दूबे को सीआरपीएफ के डीजी कमेंडेशन डिस्क से नवाजा गया था। मुन्ना ने 2009 में कोन थाना क्षेत्र के चननी में जनपंचायत लगाकर पुलिस मुखबिरी के शक में एक व्यक्ति का सिर कलम कर यूपी पुलिस को खुली चुनौती दी थी। लालव्रत, अजीत आदि के साथ 2004 से 2012 के बीच कई लैंड माइंस विस्फोट करने के साथ 50 से अधिक लोगों का सिर कलम कर यूपी, बिहार, झारखंड में दहशत पैदा कर दी थी। अजीत मुन्ना का दाहिना हाथ था।
मुन्ना का बुलावा समझा जाता था मौत
चंदौली के हिनउत में लैंड माइंस विस्फोट कर 16 पुलिसकर्मियों की हत्या और रोहतास किले पर झंडा फहराने पर वहां के प्रधान सहित उसके परिवार के चार सदस्यों का सिर कलम कर मुन्ना ने दहशत पैदा कर दी थी। उस दौरान नक्सल प्रभावित इलाके के लोगों ने सूर्यास्त के बाद घर से निकलना बंद कर दिया था। रात में उसका बुलावा आने पर लोग समझ जाते थे कि अब वह इस दुनिया में नहीं रहने वाले हैं। परिवार के सदस्य भी इसे नियति मानकर खुद को घर की देहरी के अंदर कैद कर लेते थे। अगले दिन गांव के बाहर उस व्यक्ति की सिर कटी लाश मिलती थी। उसके पकड़े जाने के बाद सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर में जहां नक्सलवाद का खौफ समाप्त हो गया। जनपद से सटे बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में भी स्थिति सामान्य हो गई है।