चतुर्मास चार महीने का आत्मसंयम काल है। इसमें जप, तप, स्वाध्याय, पूजा पाठ करना शुभ फलदायी होता है। साल में पड़ने वाली 25 एकादशी में देवशयनी एकादशी का खास महत्व है। ज्योतिषाचार्य पं. दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि एकादशी के दिन साधकों को चावल, अनाज, मसाले जैसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए।
उपवास रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। इसके साथ देवशयनी एकादशी पर माता लक्ष्मी की उपासना करने से साधकों को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन में आ रही आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।