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Rathyatra Mela: काशी में भक्तों ने खींचा जगत के नाथ का रथ, 19 घंटे किए प्रभु के दर्शन; रही तगड़ी सुरक्षा

Sun, 19 Jul 2026 01:52 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। भक्तों ने करीब 19 घंटे तक प्रभु के दर्शन किए। रथयात्रा मार्ग और मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन-पूजन और रथयात्रा में भाग लिया।
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भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Rathyatra Mela: तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के अंतिम दिन शनिवार को भी जबरदस्त भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ का अष्टकोणीय रथ खींचा और करीब 19 घंटे तक प्रभु के दर्शन किए। भगवान का रथ करीब 50 मीटर आगे बढ़कर रथयात्रा चौराहे तक पहुंचा। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर होती रिमझिम बारिश के बीच भक्तिभाव का माहौल बना रहा।

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मेले के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचे और सफेद वस्त्रों से सजे भगवान जगन्नाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। शाम ढलते ही रथयात्रा क्षेत्र श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। दर्शन का सिलसिला भोर तक चलता रहा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर आयोजित रथयात्रा के लक्खा मेले की शुरुआत भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती से हुई। सुबह स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आए भक्तों, हरे कृष्ण-हरे राम संकीर्तन सोसाइटी के अनुयायियों और संतों की भीड़ उमड़ी। सोसाइटी के अनुयायियों ने झाल-मंजीरे की धुन पर हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन और भगवान जगन्नाथ की स्तुति की।

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करीब 12 बजे श्रद्धालुओं ने चेतमणि ज्वैलर्स के सामने से भगवान का रथ खींचकर लगभग 50 मीटर आगे रथयात्रा चौराहे तक पहुंचाया। इस दौरान अजय राय ने भी रथ खींचा। जगन्नाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने भगवान को विविध पकवान और नैवेद्य अर्पित कर आरती की। दोपहर एक बजे मंदिरनुमा रथ का पट बंद कर दिया गया। दोपहर तीन से चार बजे के बीच भगवान का अंतिम बार सफेद फूलों से शृंगार कर आरती की गई। इसके बाद पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

शाम होते-होते रथयात्रा क्षेत्र से लगभग दो किलोमीटर तक मेले में भारी भीड़ रही। आसपास की सड़कें जाम की चपेट में रहीं। आठ स्थानों पर बनाई गई स्टील बैरिकेडिंग में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी थीं। श्रद्धालु हाथों में तुलसी की माला, नानखटाई और अन्य नैवेद्य लेकर भगवान का स्मरण करते हुए आगे बढ़ रहे थे। बीच-बीच में हर-हर महादेव, जय जगन्नाथ, जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष गूंजते रहे।

श्रद्धालु भगवान के श्वेत स्वरूप का अपलक दर्शन कर रथ का स्पर्श करने को सौभाग्य मान रहे थे। शाम करीब आठ बजे संध्या आरती हुई। रात करीब तीन बजे शयन आरती होनी है। इसके बाद भोर में करीब चार बजे भगवान अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। मेले की सुरक्षा में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे। एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर शिवहरि मीणा ने दर्शन करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया।

प्रभु पुरी पीठ के रसगुल्ले और कटहल का भोग लगने के बाद करेंगे मंदिर में प्रवेश
पुरी शंकराचार्य पीठ की काशी शाखा पूर्वाम्नाय श्रीदक्षिणामूर्ति मठ के प्रभारी दंडी संन्यासी स्वामी वनवैभवारण्य सरस्वती संन्यासियों के साथ अंतिम दिन रात करीब तीन बजे रथयात्रा मेले में पहुंचेंगे। पुरी की परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का पूजन कर उन्हें खाजा, फल और पौष्टिक पेय (पोणा) का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद भगवान के अस्सी स्थित मंदिर पहुंचने पर मठ की ओर से रसगुल्ला खिलाकर उनका मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा।

मालपुआ, कटहल की सब्जी और दही का लगा भोग
रथयात्रा के पहले दो दिनों में भगवान को कोहड़ा, लौकी की सब्जी, पूड़ी, दही और अचार का भोग लगाया गया था। अंतिम दिन विशेष भोग में कटहल की सब्जी, पूड़ी, दही, मालपुआ, पंचमेल अचार, पांच प्रकार के फल, नानखटाई और पेड़ा अर्पित किया गया। सुबह चना, पेड़ा, गुड़, दही और देसी चीनी का शर्बत भी चढ़ाया गया।
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बच्चों ने झूलों और व्यंजनों का उठाया आनंद
रथयात्रा मेले में बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने झूले, चरखी और खिलौनों का आनंद लिया। वहीं, बड़ों ने नानखटाई, चटपटे व्यंजन, शृंगार सामग्री और घरेलू सामान की खरीदारी की। भगवान के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने देर रात तक मेले का आनंद उठाया।
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