सारनाथ। कड़ी सुरक्षा के बीच भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे शुक्रवार को अपनी पत्नी ताशी डोमा और पुत्री के साथ काशी पहुंचे। दोपहर के वक्त उन्होंने सारनाथ में भगवान बुद्ध के अस्थि कलश का दर्शन कर उनकी प्रतिमा के सामने खाता भेंट कर दीप जलाया। शाम को बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक करने के बाद उन्होंने पतित पावनी गंगा में भी दीपदान किया। गंगा की महाआरती देख वह भाव विभोर हो उठे।
प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे शुक्रवार दोपहर 12 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे और सीधे नदेसर स्थित होटल गेटवे गए। कुछ देर विश्राम के बाद वह 1:20 बजे सारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले भारतीय पुरातत्व संग्रहालय देखा।
यहां रखे सिंह शीर्ष के बारे में संग्रहालय के प्रभारी अजय श्रीवास्तव से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पद्मासन मुद्रा में बैठे भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए। दोपहर में वे लंच के लिए होटल लौटे। फिर करीब 3:15 बजे वह दोबारा सारनाथ पहुंचे और चौखंडी स्तूप, धर्मराजिका स्तूप को देखा। धमेख स्तूप के सामने पूजन-अर्चन किया।
मूलगंध कुटी विहार पहुंचे प्रधानमंत्री का स्वागत विहाराधिपति भिक्षु पी शिबली थेरो ने खाता भेंटकर किया। इसके बाद उन्होंने बोधिवृक्ष की परिक्रमा की। भूटान के पीएम के आगमन पर सुरक्षा कारणों से संग्रहालय में आमजन का प्रवेश बंद कर दिया गया था। इससे बाहर से आए पर्यटक कुछ निराश हुए। शाम को 5:17 बजे शेरिंग विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। वहां 5:25 बजे उन्होंने गर्भगृह में प्रवेश किया। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने 11 आचार्यों के साथ षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक कराया।
शेरिंग ने बाबा के दरबार में लोक कल्याण का संकल्प लिया। यहां से 5:43 पर निकल कर वे 5:50 पर दशाश्वमेध घाट पहुंचे। वहां पहले मंत्रोच्चार के साथ गंगा पूजा की। इसके बाद दीपदान किया। गंगा की महाआरती में वो पूरे समय रहे। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र और हनुमान यादव ने उन्हें स्मृति चिह्न और रुद्राक्ष की माला भेंट की। प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे शनिवार की सुबह 9:35 बजे स्पेशल एयरक्राफ्ट से बोधगया रवाना हो जाएंगे।