बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में मंगलवार को आयोजित ‘डेवलपमेंट डायलॉग-2016’ में देश भर से आए उद्यमियों ने युवाओं को कामयाबी की राह बताई। कहा कि उद्यम के लिए नई सोच, नए विचार ही नहीं, संवेदनशीलता, समझ और सामाजिकता की भी जरूरत पड़ती है। हमें सिर्फ उद्यम नहीं बल्कि सामाजिक उद्यम को भी बढ़ावा देना होगा। जब तक हम समाज की समस्याओं से जुड़ेंगे नहीं, उनका समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे।
देशपांडे फाउंडेशन, एक सोच सैंडबॉक्स और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. गुरुराज देशपांडे ने कहा कि युवाओं को मिलकर एक बेहतर दुनिया का निर्माण करना है। इसके लिए आप समस्याएं न गिनाएं बल्कि उनका समाधान ढूंढें। एक सोच सैंडबॉक्स के संस्थापक दिलीप मोदी ने युवाओं को सलाह दी कि आप खुद को सक्षम बनाइए और दूसरों को नौकरी दीजिए। कहा कि सपने पूरे करने के लिए मेहनत और जुनून जरूरी है। अगस्त्या फाउंडेशन के संस्थापक रामजी राघवन ने कहा कि हमें ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य लिए बेहतर काम करना चाहिए। ग्रामीण बच्चों को विज्ञान की दुनिया से जोड़ना होगा।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि हमें गांव के स्तर पर काम करना होगा। देबाशीष मित्तर ने कहा कि उद्यमी, एनजीओ, नीति निर्माताओं और संस्थाओं के बीच समन्वय से ही समस्याओं का समाधान होगा। डॉ. शेली बत्रा ने बताया कि किस तरह वे टीबी के मरीजों के लिए 78 देशों में काम कर रही हैं। जयपुर रग्स के संस्थापक एनके चौधरी, सीएल एजूकेट के सत्यनारायण, उद्योगिनी की रीता सेनगुप्ता, रंगसूत्र की सुमिता घोष जैसे 30 से अधिक लोगों ने शिक्षा, आजीविका, सामाजिक उद्यमियों के लिए कोचिंग, अगली पीढ़ी की सामाजिक उद्यमिता आदि पर विचार रखे।