वाराणसी में शनिवार को बीएचयू के जनसमर्क व पत्रकारिता सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी में दीप प्रज
बीएचयू के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने देवर्षि नारद और भारतीय संचार परंपरा पर बात रखी। बतौर मुख्य वक्ता काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्र ने कहा कि देवर्षि नारद संदेशवाहक नहीं, उचित मार्गदर्शन देने वाले आदर्श संचारक हैं। उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है।
विश्वविद्यालय में हुई संगोष्ठी में विश्वभूषण मिश्र ने नारद को सत्य, ज्ञान और संवाद और भारतीय परंपरा का महान ज्ञाता और प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उनकी वाणी समाज को नैतिकता और लोक कल्याण का मार्ग दिखाती है। काशी नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि पत्रकारिता एक कला है। इसमें अभिव्यक्ति और संवेदनशीलता का संतुलन आवश्यक है। वर्तमान में पत्रकारिता में महर्षि नारद के आदर्शों पर कार्य किया जाए तो देश अखंड भारत बन सकता है। विभागाध्यक्ष प्रो.ज्ञान प्रकाश मिश्र ने बताया कि संगोष्ठी में 119 शोध पत्र पढ़े गए।
कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि पत्रकारिता केवल लेखन नहीं, बल्कि समाज की सोच को दिशा देने का माध्यम है। आर्य महिला पीजी कॉलेज की सहप्रबंधक पूजा दीक्षित ने कहा कि नारद के सकरात्मक संचार ने तीनों लोकों को एक दूसरे से जोडने का काम किया। नए संदर्भों में महर्षि नारद पहले से भी ज्यादा प्रासंगिक है। संचालन डॉ. बाला लखेंद्र ने किया। इस दौरान प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. शोभना नार्लीकर, डॉ. नेहा पांडेय, प्रोफेसर पवन पांडेय मौजूद रहे।