घाटों पर लगी आस्थावानों की कतार
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शुक्रवार को दोपहर से ही आस्थावनों की कतार गंगा घाटों की गलियों से जुड़ने लगीं। सूर्यास्त के साथ ही माटी के दीपों में तेल की धार से रुई की बाती तर होकर दैदीप्यमान हो उठी। गोधूलि बेला में एक-एक कर दीपों की लड़ियां पूनम के चांद को भी अपनी रोशनी से चुनौती देते नजर आईं। काशी विश्वनाथ दरबार से लेकर सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर शाम होते ही दीयों से सजने लगा।
देव दीपावली की रात साक्षात देवलोक गंगा के तट पर उतर आया। उत्तरवाहिनी के अर्द्धचंद्राकार घाटों ने दीपों के चंद्रहार से शृंगार किया तो इस अलौकिक आभा को आंखों में समाने के लिए श्रद्धालुओं ने भी जतन किए। रात गहराने के साथ ही गंगा की लहरों पर दीयों के प्रकाश का स्वर्णिम सौंदर्य और गहराता चला गया।
पंचगंगा पर जल उठा हजारा दीप
पंचगंगा घाट पर प्रकाशित होने वाला हजारा दीपों के मंच ने भी आभा बिखेरी। दशाश्वमेध घाट पर दोपहर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। गंगा पार रेती पर शिक्षकों ने रंगोली के जरिए काशी के घाटों का अप्रतिम सौंदर्य उकेरा।
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धर्मनगरी काशी में सदानीरा के तट पर विश्वविख्यात देव दीपावली पर शुक्रवार को देश-विदेश के सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ा। राजघाट से अस्सी तक दीपदान के लिए ऐसा रेला दोपहर से उमड़ना शुरू हुआ कि शाम से पहले ही घाटों की ओर जाने वाली गलियां जाम हो गईं। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुृओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक चलता रहा।
कार्तिक पूर्णिमा पर सूर्य निकलने से पहले ही आस्था की डुबकी शुरू हुई तो सूर्य अस्त होते ही माटी के दीपों से घाट प्रकाशित हो उठे। राजघाट से पंचगंगा और उधर अस्सी से दशाश्वमेध तक पैर नहीं रख पाने के माहौल में शृंखलाबद्ध दीप देवताओं के धरती पर आगमन के स्वागत को आतुर थे। दोपहर बाद से ही लक्सा से लेकर दशाश्वमेध, शीतला, पंचगंगा, तुलसी, मुंशी, सिंधिया, आदिकेशव सहित अन्य घाटों पर पहुंचने के लिए लंबी कतार लग गई थी।
घाट पर उमडे़ जनसैलाब के बीच हर-हर महादेव के गगनचुंबी जयकारों ने देव दीपावली की अनुपम छटा को और निखार दिया। श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी तो लोगों को ठंड का अहसास भी नहीं हुआ।देवदीपावली पर जैसे-जैसे भगवान भास्कर अस्ताचलगामी हुए गंगा तट, कुंड, सरोवर और मंदिरों में दीपदान करने वालों का रेला बढ़ता ही चला गया।
काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा मारकंडेय महादेव, जागेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, सारंगनाथ महादेव, बड़ा गणेश, कालभैरव, बटुक भैरव, मणि मंदिर, बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में भी शाम होते ही दीप जल उठे। इसके अलावा कैंट रेलवे स्टेशन पर दीप जलाए गए।
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देव दीपावली पर जहां घाटों पर दीपों का अलौकिक नजारा दिखा, वहीं तेल, दिया और बाती की कमी से गंगा पार रेती पर कम दीपक जलाए गए। हालात यह हो गए कि दीयों की कमी के चलते सेक्टर 18 व 19 में दीपदान का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
शुक्रवार को सुबह नौ बजे से ही शिक्षक गंगा पार रेती पर जुटने लगे थे। लेकिन दोपहर दो बजे तक कई सेक्टरों को दीया, बाती व तेल नहीं उपलब्ध हो सका था। दोपहर बाद प्रशासन की ओर से दीया तो उपलब्ध कराया गया, लेकिन कई सेक्टरों को आखिरी वक्त तक बाती नहीं मिल सकी।
शिक्षकों ने अपने खर्चे से बाती, दीया और तेल का इंतजाम करके देव दीपावली के आयोजन को पूर्ण किया। वहीं रेत पर गंदगी व बदबू के कारण दीपदान की ड्यूटी में लगे शिक्षक परेशान रहे। प्रशासन द्वारा तैयार कराए गए मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था नाकाफी रही।
35 हजार दीपों के लिए मिला एक टीन तेल
गंगा पार रेत पर 11 से 20 सेक्टर में बेसिक शिक्षा विभाग को साढ़े तीन का लाख दीप जलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें एक सेक्टर में 35 हजार दीप जलाने थे। इनको जलाने के लिए किसी सेक्टर को तीन तो किसी सेक्टर को एक टीन तेल दिया गया। वहीं शिक्षकों को वापस आने के लिए काफी फजीहत उठानी पड़ी। पर्यटन विभाग की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को अलॉट की गई नाव का इंतजाम न किया गया। नाव न मिलने के कारण कुछ तो पैदल ही रामनगर की ओर चल पड़े।
देव दीपावली पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। अपराह्न से लेकर कार्यक्रम समाप्ति तक पुलिस गंगा घाटों और प्रमुख चौराहों पर मुस्तैद रही। गंगा में रिवर रेस्क्यू आपरेशन की क्यूआरटी 84 घाटों पर चक्रमण करती रही और नाव पर कहीं भी क्षमता से अधिक यात्री नहीं थे। इसकी निगरानी में जल पुलिस और इलाकाई पुलिस अंतिम समय तक डटी।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश, अपर पुलिस आयुक्त अपराध व मुख्यालय सुभाष चंद्र दुबे और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था अनिल कुमार सिंह पूरे समय तक निगरानी व्यवस्था में लगे रहे। सुबह और शाम के समय काशी व वरुणा जोन के डीसीपी, एडीसीपी और सभी एसीपी अपने-अपने सर्किल में थानेदारों के संग मुस्तैद रहे। संदिग्धों की सघन तलाशी ली गई। गंगा घाटों के साथ ही शहर के प्रमुख कुंड और तलाबों पर भी पुलिस का पहरा रहा।
उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुंड और तलाबों पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण नीरज पांडेय और सभी क्षेत्राधिकारियों के नेतृत्व में थानेदार सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे।