वाराणसी जिले में डेंगू के प्रकोप से हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच डेंगू से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर उठने वाले सवालों के बाद बुधवार को शासन से दो सदस्यीय टीम बनारस पहुंची। टीम ने अपर निदेशक कार्यालय और इसके बाद दीनदयाल अस्पताल जाकर वहां ब्लड बैंक में जांच, भर्ती मरीजों के इलाज के बारे में जानकारी ली।
टीम को बीएचयू और मंडलीय अस्पताल भी जाना था लेकिन सदस्य वहां नहीं जा सके। शहर और ग्रामीण इलाकों से हर दिन सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। यहां डेंगू की पुष्टि होने के बाद मरीजों को डेंगू वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की जांच रिपोर्ट के अनुसार मार्च से लेकर अब तक 300 मरीज डेंगू के मिल चुके हैं, वहीं सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर करीब आधा दर्जन मौत भी हो चुकी है। इस बीच मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मचा है।
अस्पतालों में अलर्ट के बाद अब बुधवार को शासन स्तर से संयुक्त निदेशक मलेरिया के नेतृत्व में आई टीम ने डेंगू मरीजों के लिए जांच किट, प्लेटलेट्स, वार्ड में इलाज की व्यवस्था आदि के बारे में जानकारी ली। इसके बाद सीएमओ डॉ. वीबी सिंह से मुलाकात कर मरीजों का हर संभव बेहतर इलाज कराए जाने को कहा।
दीनदयाल में दो दिन में 54 में डेंगू की पुष्टि
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की पैथालॉजी में जांच कराने वाले लोगों में दो दिन में 54 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसमें 15 अक्तूबर को 112 सैंपल की जांच की गई, जिसमें 37 की रिपोर्ट पॉजीटिव आई।
इसके अलावा 16 अक्तूबर को जिन 62 लोगों का सैंपल लिया गया था, उसमें 17 की रिपोर्ट पॉजीटिव आई। जिन लोगों में डेंगू की रिपोर्ट पॉजीटिव आई हैं, उसमें अधिकांश लोग वरुणापार के रहने वाले हैं। राजातालाब के कनेरी,उसरा, ढढोरपुर के कई लोग डेंगू से पीडि़त मिले।
इस बीच क्षेत्र के बाबूराम के पूरा निवासी शशि भूषण मिश्रा का पूरा परिवार जो मंडुवाडीह क्षेत्र के एक कालोनी में रहता है, डेंगू की चपेट में आ गया है। शशिभूषण मिश्रा ने बताया कि पत्नी मीरा मिश्रा, पुत्र निखिल कुमार, पुत्री तान्या और सौम्या को डेंगू हुआ था।
उधर, शहर के ब्लड बैंकों में प्लेटलेटस के लिए हर दिन मारामारी हो रही है। सबसे अधिक भीड़ लहुराबीर स्थित आईएमए ब्लड बैंक पर लग रही है। यहां सुबह से लेकर देर रात मरीजों के परिजनों की भीड़ लग रही है। सबसे अधिक मांग सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की हो रही है। इसके अलावा बीएचयू और निजी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में भी प्लेटलेट्स की खपत बढ़ गई है।