वाराणसी। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के असामयिक निधन से काशी भी शोक मेें डूब गई है। बनारस से अरुण जेटली का बहुत पुराना नाता रहा। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव की पूरी कमान अरुण जेटली ने संभाली थी। उस समय जनसभा की अनुमति नहीं मिलने पर तत्कालीन यूपी प्रभारी अमित शाह के साथ मालवीय प्रतिमा पर धरना देकर विरोध भी जताया था। ऐसे ही एक मामले में अरुण जेटली की रणनीति के कारण ही लोकसभा प्रत्याशी रहे नरेंद्र मोदी के स्वागत में काशी की जनता सड़कों पर उतर गई थी।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बनाने के निर्णय में अरुण जेटली ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद अमित शाह के साथ अरुण जेटली ने वाराणसी में बैठकर पूरे चुनाव की रणनीति बनाई थी। प्रमुख रणनीतिकार के रुप में प्रत्येक कार्यकर्ता से सीधा संवाद और चुनाव के एक-एक निर्णय वे स्वयं लेते थे। पूर्व वित्त मंत्री के करीबियों में शुमार एमएलसी अशोक धवन ने बताया कि भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के पहले काशी आगमन पर हमने गंगा दर्शन की अनुमति प्रशासन से मांगी। मगर, उनके आगमन से एक दिन पहले प्रशासन ने अनुमति रद्द कर दी। जब चुनाव कार्यालय पर हमने अरुण जेटली को यह सूचना दी तो पहले उन्होंने दो मिनट तक आंखें बंद रखीं। फिर बोले, अगर कोई प्रत्याशी रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से चुनाव कार्यालय सड़क मार्ग से आना चाहे तो क्या। इस पर लोगों ने बताया कि प्रत्याशी के लिए रोक नहीं है। अरुण जेटली ने कहा कि यह सूचना प्रसारित करा दें कि भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी बीएचयू हेलीपैड से सड़क मार्ग से सिगरा स्थित गुरुधाम तक आएंगे। उन्होंने पदाधिकारियों को हिदायत भी दी कि कोई उन्हें रिसीव करने नहीं जाएं, वे खुद ब खुद आ जाएंगे। अगले दिन काशी की जनता नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए सड़कों पर उतर गई।
अंतिम बार विधानसभा चुनाव में आए थे पूर्व वित्त मंत्री
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का अंतिम काशी दौरा वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में था। उस वक्त उन्होंने मलदहिया स्थित प्लाजा में व्यापारियों की बड़ी बैठक की थी। यहां प्रेसवार्ता कर भाजपा के घोषणा पत्र के बारे में बताया था। इसके अलावा व्यापारियों और उद्यमियों के अलग-अलग कार्यक्रम में शिरकत की थी।
मोरारी बापू की मौजूदगी में शव वाहिनी का किया था लोकार्पण
28 मार्च 2015 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अस्सी घाट से जल, थल शव वाहिनी का लोकार्पण किया था। पूर्वांचल सहित अन्य शहरों से मोक्ष प्राप्ति के लिए आने वाले लोगों को दुश्वारियों से बचाने के लिए यह पहल की गई थी। उस दौरान रामकथा मर्मज्ञ मोरारी बापू मौजूद थे।
बीएचयू के लॉ छात्रों ने किया था इंटर्न
वर्ष 2007 में बीएचयू के विधि संकाय के प्रोफेसर एमपी सिंह के निर्देशन में लॉ छात्रों ने इंटर्नशिप किया था। अधिवक्ता राज श्रीवास्तव का कहना है कि वे पूरी गंभीरता से इंटर्न से भी बात करते थे। युवाओं को हमेशा प्रमोट भी करते थे।
वित्त मंत्री के रुप में अरुण जेटली के कार्यकाल को सदैव याद रखा जाएगा। एक राष्ट्र, एक कर को लागू कर उन्होंने ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उनका असमय जाना भारतीय राजनीति की क्षति है।
अशोक धवन, एमएलसी
कार्यकर्ताओं के प्रति अरुण जेटली का अगाध स्नेह रहता था। कई ऐसे मौके आए, जब काशी के कार्यकर्ताओं से उन्होंने सीधा संवाद किया और हमेशा वे कार्यकर्ताओं को तरजीह देते थे।
धर्मेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, काशी क्षेत्र भाजपा
अद्भुत वक्ता, अधिवक्ता, वाकपटु और भारतीय राजनीति के सिरमौर नेता के रुप में अरुण जेटली की पहचान थी। उनके जाने से रिक्त हुआ स्थान अब शायद नहीं भर पाएगा।
डा. नीलकंठ तिवारी, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार
प्रखर वक्ता पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन की सूचना से पूरा देश स्तब्ध है। उनका निधन देश और समस्त भाजपा परिवार के लिए एक बड़ी क्षति है।
अनिल राजभर, कैबिनेट मंत्री
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पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को काशी के शिल्प और संस्कृति से था अगाध प्रेम
जीआई उत्पाद बनारस बीड्स पर लगे 18 प्रतिशत जीएसटी को किया था पांच प्रतिशत
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को काशी के शिल्प और संस्कृति से अगाध प्रेम था। यहीं कारण रहा कि जब जीएसटी लागू हुआ तो जीआई उत्पाद ग्लास बीड्स पर 18 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया। काशी से एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने नई दिल्ली पहुंचा। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही इसमें राहत दी जाएगी। एक पखवारे के भीतर ग्लास बीड्स पर जीएसटी में 13 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई। बनारस बीड्स के सीएमडी अशोक गुप्ता ने बताया कि दो मार्च 2017 में अरुण जेटली उद्यमियों से मिलने और उनकी समस्या जानने काशी आए थे। अशोक गुप्ता ने बताया कि कई समाधान तो उन्होंने तत्काल कर दिए तो वहीं कुछ समस्याएं उनके जाने के बाद निपट गई। उद्यमी आरके चौधरी ने बताया कि अरुण जेटली से कई बार मिलने का मौका मिला। वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। बिल्डर अनुज डिडवानिया ने बताया कि एक बैठक में उनसे मुलाकात हुई। वे चीजों को बहुत जल्दी समझ जाते थे। उनके जैसा अर्थशास्त्री मिलना मुश्किल है।