वाराणसी। जो धर्म है वही दर्शन है यह भारतीय दृष्टि है। मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति का नाश केवल दर्शन के माध्यम से हो सकता है। यहीं पर दर्शन की उपयोगिता सिद्ध होती है। भारतीय दर्शन केवल दर्शन की ही बात नहीं करता अपितु सर्व दर्शन की व्याख्या करता है। यह कहना है महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल का। वे काशी विद्यापीठ में दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से दर्शनशास्त्र एवं इसकी अनिवार्यता विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि अंत:क रण का मंथन ही दर्शन है। बीएचयू के प्रो. अरविंद कुमार राय और प्रो. मुकुल राज मेहता ने भी विचार रखे। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र ने किया। संचालन डॉ. पीतांबर दास तथा स्वागत भाषण संकायाध्यक्ष प्रो. शशि देवी सिंह ने किया। इस दौरान प्रो. सभाजीत सिंह यादव, प्रो. विष्णु दत्त पांडेय, डॉ.नंदिनी सिंह, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. प्रभाशंकर मिश्र, डॉ. रुद्रानंद तिवारी, वरुणा सिंह, संतोष कुमार सिंह, चंद्रशेखर सिंह, शशि भूषण प्रजापति, गणेश जायसवाल, धीरेंद्र कुमार शुक्ला, रामाश्रय, सतीश कुमार, चंदन कुमार प्रजापति और शशि कुमार शर्मा उपस्थित थे।