फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शास्त्री की डिग्री को अमान्य करना संस्कृत पर कुठाराघात

विज्ञापन
विज्ञापन
सेना के धर्मगुरु की परीक्षा में शास्त्री डिग्री धारकों को बाहर किए जाने का काशी के विद्वत समाज ने विरोध किया है। काशी के विद्वानों का कहना है कि शास्त्री की डिग्री को अमान्य किया जाना संस्कृत पर कुठाराघात है। काशी विद्वत परिषद और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की ओर से रक्षामंत्री को पत्र लिखकर विरोध जताया गया है।
विज्ञापन

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि परिषद की बैठक में सेना द्वारा धर्मगुरु की परीक्षा में शास्त्री उपाधि धारकों को बाहर किए जाने पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। इससे संस्कृत भाषा प्रेमियों तथा संस्कृत जगत के विद्वानों में रोष है कि पारंपरिक विषयों के साथ इस तरह का अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रो. द्विवेदी ने रक्षामंत्री को लिखे गए पत्र में शास्त्री उपाधिधारकों को परीक्षा में शामिल किए जाने की मांग की है। कहा कि भारत के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों में यूजीसी द्वारा शास्त्री बीए के समकक्ष और आचार्य एमए के समकक्ष मान्यता प्राप्त है। बावजूद इसके सेना में शास्त्री के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव का रवैया अनुचित है।
न्यास ने भी भेजा पत्र
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य प्रो. ब्रजभूषण ओझा ने कहा कि मंदिर न्यास भी इस घटना की निंदा करता है। हमने रक्षामंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में बातचीत करने का समय मांगा है। शास्त्री डिग्रीधारियाें को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर करना अन्यायपूर्ण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें