जांच से पता चला कि क्षेत्र के ही इरशाद ने बच्ची को अगवा किया और दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। बच्ची का पोस्टमार्टम महिला डॉक्टरों की टीम ने किया और रिपोर्ट पुलिस को दी। इसमें बच्ची के साथ बर्बरता की बात कही गई। दुष्कर्म की पुष्टि के साथ ही गला दबाने और पत्थर से कूंचे जाने का मामला सामने आया।
13 दिन में पुलिस ने पूरी की विवेचना
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 13 दिन में विवेचना पूरी की और सात जनवरी 2025 को आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। विशेष न्यायाधीश ( पॉक्सो एक्ट तृतीय) ने मामले की सुनवाई की और 7 नवंबर 2025 को फैसला सुरक्षित कर लिया। अदालत ने 18 नवंबर को इरशाद को फांसी की सजा सुनाई। अभियोजन की तरफ से सात गवाह पेश किए गए। इनमें बच्ची के पिता के साथ ही कुछ पुलिसकर्मी और बच्ची की पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर भी शामिल थीं।
अभियोजन के मुताबिक, वादी ने रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 24 दिसंबर 2024 को उसकी 8 साल की बेटी 24 दिसंबर की शाम लगभग 6.30 बजे मोहल्ले में ही स्थित एक दुकान पर मच्छर मारने वाली क्वायल खरीदने गई थी लेकिन घर नहीं लौटी। परिवार के अन्य सदस्यों ने उसकी खोजबीन की लेकिन कहीं पता नहीं चला। परिजन तुरंत सूजाबाद पुलिस चौकी पर गए लेकिन चौकी के पुलिसकर्मियों ने तेजी नहीं दिखाई। अगले दिन 25 दिसंबर की सुबह लोगों से जानकारी मिली कि बहादुरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर के अंदर बोरे में बच्ची का शव पड़ा है। बच्ची की सिर कूंचकर हत्या के बाद बोरे में शव भरा गया था। मौके पर पहुंची रामनगर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
सीसीटीवी से पहचान, मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हुआ था इरशाद
अभियोजन के मुताबिक तत्कालीन रामनगर थाना प्रभारी निरीक्षक राजू सिंह ने सीसीटीवी की जांच की। इससे पता चला कि इरशाद ने ही बच्ची को अगवा किया था। पुलिस जब इरशाद के घर दबिश को पहुंची तो वह भाग निकला। 26 दिसंबर की रात रामनगर पुलिस ने आरोपी इरशाद को डोमरी क्षेत्र में मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी। पूछताछ में इरशाद ने पुलिस को बताया था कि जैसे ही बच्ची दुकान से सामान लेकर घर लौट रही थी तभी उसका मुंह दबाकर सुनसान स्थान पर ले गया और दुष्कर्म किया। बच्ची के जिंदा बचने और गिरफ्तारी के भय से स्कार्फ से गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को बोरे में भरा और सरकारी स्कूल में फेंक दिया।
अभियोजन के मुताबिक, पुलिस ने वारदात स्थल से बरामद बच्ची की शर्ट, बटन, खून से सनी ईंट, बोरे आदि साक्ष्य के तौर प्रस्तुत किए। फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य पुख्ता साक्ष्य कोर्ट में पेश किया गया। वर्तमान में रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह ने बताया कि दोषी इरशाद ने बहुत ही बेरहमी से बच्ची की हत्या की थी। बोरे में शव भरने के बाद बच्ची के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर वजनी पत्थर से कई बार कूंचा था। तीन स्थानों पर वारदात को अंजाम दिया था।