प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामहोपाध्याय पद्मश्री प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री के निधन पर शोक संदेश भेजा है। वागीश शास्त्री के पुत्र आशापति त्रिपाठी को भेजा गया यह संदेश पूरी तरह से संस्कृत में है। प्रधानमंत्री ने वागीश शास्त्री के निधन को संस्कृत जगत के लिए की अपूरणीय क्षति बताया है।
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शोक संवेदना व्यक्त कर पत्र में लिखा गया है कि आचार्य के निधन की सूचना पाकर अत्यंत दुखी हूं। इस कष्टप्रद समय में मेरी संवेदनाएं परिजनों के साथ हैं। संस्कृत लिखने, पढ़ने और बोलने की अत्यंत सरल विधि की खोज उनके जीवन की एक अति महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्कृत को भारत के बाहर प्रचारित प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संस्कृत की सेवा सदा-सदा याद रखी जाएगी। वागीश शास्त्री सशरीर हमारे बीच भले ही नहीं हैं मगर उनके द्वारा विकसित संस्कार और जीवन मूल्य सदैव समाज में प्रतिष्ठित रहेंगे। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। साथ ही यह भी कामना करता हूं कि ईश्वर उनके परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
प्रो. वागीश शास्त्री के निधन से मर्माहत स्विट्जरलैंड की शिष्या नारडिया चार्लीकर ने शनिवार को अपना मुंडन कराया। नारडिया के साथ ही देश-विदेश के कई शिष्यों ने मुंडन कराकर अपने गुरु को नमन किया। ब्यूरो