कर्ज में हैं पिता, कोच करते हैं काफा मदद
पिता अनिल ने आगे बताया कि आकांक्षा के लिए हम पड़ोसियों से या जानने वालों से कर्ज लेकर उसे खेलने भेजते हैं। इसमें हमारा सपोर्ट उनके कोच आफताब भी करते हैं। मां मंजू के अनुसार, आकांक्षा, उन्नति और आशीर्वाद हमारे तीन बच्चे हैं। आकांक्षा पढाई और खेल दोनों में तेज है।
वह घर का हर काम करती है लेकिन कराटे को लेकर दीवानी है। अक्सर उसे कहीं खेलने जाना होता तो घर में पैसा नहीं होता। ऐसे में हमें रिश्तेदारों, पड़ोसियों से कर्ज लेना पड़ता है। हमारी बेटी हमारा नाम रौशन कर रही है।