वापसी के दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मारी और रोहित को छुड़ा ले गए। बुधवार की सुबह से ही गांव के लोग दुर्ग विजय के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे। पार्थिव शरीर नौ बजे गांव पहुंचा तो ग्रामीण उनके आवास पर उमड़ पड़े।
पत्नी इंदू देवी पुत्री निधि, ब्यूटी, रागिनी, रुबी के साथ पुत्र पवन कुमार सिंह पिता के पार्थिव शरीर से लिपट कर बिलख पड़े। ऐसे में वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान रोते हुए वह अपर पुलिस अधीक्षक एसके श्रीवास्तव के पास हाथ जोड़कर पहुंची, पूछी मेरे पापा के हत्यारे कहां है। आप लोग क्या कर रहें थे? उसके प्रश्नों का उत्तर वहां मौजूद किसी के पास नहीं था। गार्ड आफ आनर के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए गाजीपुर ले जाया गया।
दुर्ग विजय सिंह का शव घर पहुंचते ही उनकी बेटी का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरा परिवार गमगीन था। श्मशान घाट पहुंचे एसपी डा अरविंद चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारियों ने शहीद को नमन किया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।