लाल निशान छूने को आतुर सरयू नदी के तेवर तल्ख हो गए हैं। जल स्तर में लगातार वृद्धि का सिलसिला जारी रहने से बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार की शाम जलस्तर 63.880 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.010 मी. से महज 13 सेंटीमीटर नीचे है। आयोग के अनुसार एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है।
आयोग ने सोमवार सुबह जलस्तर खतरे के निशान को पार करने का पूर्वानुमान किया है। बलिया जिले के चैनपुर गुलौरा और तुर्तीपार में कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि कट- कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है। नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्रों में फैल गया है।
हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती चैनपुर गुलौरा, टगुनिया, खैराखास, तुर्तीपार, मुजौना, बेल्थराबाजार, सहिया, हल्दीरामपुर आदि ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। एसडीएम सर्वेश कुमार ने कहा कि बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है।
गंगा का जलस्तर जैसे ही तलहटी से ऊपर उठना शुरू हुआ की शनिवार की शाम बलिया के रामगढ़ के सोनार टोला के बगल में बन रहे स्पर के बगल खोदा गया अप्ररन का गड्ढा और लोहे के जाली में बिछाया गया बोल्डर अचानक भरभरा कर गिर गया। जैसे ही कटान शुरू हुआ अफरातफरी मच गई। जब बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा को स्पर व खोदे गए गड्ढे के बीच बोल्डर से बनाए गए प्लेटफार्म के बैठने की सूचना दी गई तो उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म बैठ गया होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा नदी उफनाई तो एनएच-31 के साथ ही सोनारटोला, बनिया टोला, रामगढ़, सुघर छपरा ,केहरपुर, दुबे छपरा, उदई छपरा, गोपालपुर करीब 50 हजार की आबादी तत्काल प्रभावित हो जाएगी। अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि एनएच-31 पर कोई खतरा नहीं है। गंगा का जलस्तर कम होते हैं। सभी कटान रोधी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।