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अपनी विशिष्टता को भूल आधुनिक दुनिया के पथ पर चल पड़ा है भारतः दलाई लामा

Mon, 01 Jan 2018 02:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि अपने प्राचीन ज्ञान से कभी भारत ‘गुरु’ था। आज वो अपनी इस विशिष्टता को भूलकर आधुनिक दुनिया के पथ पर चल पड़ा है। जबकि उसे अपने मूल से जुड़े रहने की जरूरत है।
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 भारतीय ज्ञान और परंपरा में आज भी वो सामर्थ्य है जिससे न सिर्फ स्वयं भारत बल्कि पूरे विश्व को शांति पथ पर ला सकता है। भारत अपने ज्ञान को पुनर्जीवित कर दुनिया के बेहतर दिशा की ओर ले जाने में अपना योगदान दे सकता है।

दलाई लामा ने रविवार को सारनाथ स्थित केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान की स्वर्ण जयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘भारतीय दार्शनिक प्रस्थानों एवं आधुनिक विज्ञान में मन की अवधारणा’ के समापन सत्र में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि लोग कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश देते हैं लेकिन मैं नहीं मानता कि कबूतर उड़ान शांति की स्थापना की जा सकती है। हम शांति स्थापित करना चाहते हैं तो पहले आंतरिक शांति स्थापित करनी होगी।

पहले जानवर इंसान को मारता था तो वो खबर बनती थी, लेकिन दुखद है कि आज इंसान इंसान को मार रहा है और हम इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। ये भयावह है। ऐसे विध्वंसकारी भावनाओं पर काबू पाने की जरूरत है। हमें ऐसी मानसिकता को बदलना होगा। ये सिर्फ भारतीय ज्ञान परंपरा से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराएं मनुष्य की आंतरिक शांति और मन की भावनाओं के नियंत्रण में रख सकती हैं। आज हमारे सामने कई समस्याएं हैं जिनका समाधान भारत के प्राचीन ज्ञान और विज्ञान में हैं। देश की सरहद से ऊपर उठकर हमें मानवता के हित में कार्य करना होगा। 
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अविद्या को नष्ट करोगे तभी होगी बुद्ध की प्राप्ति

अतिथि प्रोफेसरों के साथ दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला
दलाईलामा ने कहा कि अविद्या को नष्ट करोगे तभी बुद्ध की प्राप्ति होगी। कर्म की वजह से ही दुख उत्पन्न होता है। दुनिया में सभी सुख, खुशी और मित्र चाहते हैं। क्रोध ही शत्रु का आधार है। जो दुख हैं परेशानियां हैं वह समस्याएं हमारी पैदा की हुई हैं। इसका समाधान भी हमको ही निकालना होगा।

सभी समस्याओं के मूल में मनुष्य की नकारात्मक भावनाएं हैं। इसमें पूरे विश्व की मदद भारत ही कर सकता है। भारत की युवा पीढ़ी प्राचीन ज्ञान को नकार कर पाश्चात्य शैली को अपना रही है।

बावजूद इसके विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में यह क्षमता है कि वह पूरे जगत को अपने प्राचीन ज्ञान से नई दिशा दे सकता है। धर्मगुरु ने कहा कि जब तक आपके अंदर बुरे विचार होगे आप मन का बेहतर उपयोग नहीं कर सकेंगे।

भोगवादी समाज के विस्तार से आज संपूर्ण मानव समुदाय के समझ कई अनसुलझी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। भारत के प्राचीन ज्ञान में इतना सामर्थ्य है कि वह पूरी दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकता है।
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