ब्लास्ट के बाद बाइक, घायल बच्ची।
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सूजाबाद में गुब्बारे भरने वाले सिलिंडर का विस्फोट इतना तगड़ा था कि सिलिंडर वाली ट्राली के परखच्चे उड़ गए। यहां मौजूद बबलू का दाहिना पैर अलग हो गया। इस घटना के चश्मदीद मंजर याद कर सिहर जा रहे हैं। लोहे की चादर वाली ट्राली कई भाग में होकर बिखरी थी। लगभग 100 मीटर तक टुकड़े फैले हुए थे।
आसपास तीन-चार साइकिल व बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची तो गैस सिलिंडर की टंकी के फैले टुकड़े को कब्जे में ले लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि टंकी काफी पुरानी और पतली होने के कारण यह दबाव सह नहीं सकी और विस्फोट हो गया।
पड़ोस में बहादुरपुर गांव के बीडीसी रितेश दुबे, प्रधान मेराज और रामबाबू पटेल ने बताया कि विस्फोट इतना तेज था कि बहादुरपुर गांव तक सुनाई दिया। मौके पर भाग कर गए तो हर तरफ खून और मांस के लोथड़े फैले हुए थे। आसपास के ठेले व साइकिल क्षतिग्रस्त पडे़ थे। हर तरफ चीख पुकार और भागमभाग मची थी। एंबुलेंस का इंतजार किए बगैर घायलों को आटो और अन्य वाहनों के जरिए अस्पताल भिजवाया गया। घटना के बाद घंटे भर तक इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
पहले भी कई बार गुब्बारा में हवा भरने वाली सिलिंडर की टंकी फट चुकी है। 24 दिसंबर 2018 को जैतपुरा थाना अंतर्गत नक्खीघाट पुल के पास सिराजुद्दीन के मकान में गुब्बारे में गैस भरते समय सिलिंडर ब्लास्ट होने से आठ लोग जख्मी हुए थे। इसमें अमरजीत के दोनों पैर व बायां हाथ उड़ गया था। सिलिंडर टंकी फटने से घायल आठ सदस्यों को ठीक होने में साल भर लग गए थे। सूजाबाद की घटना ने नक्खीघाट हादसे की याद ताजा कर दी।
यही नहीं, अक्तूबर 2018 में रामनगर के रामलीला के दौरान गुब्बारा में गैस भरने के दौरान हुए विस्फोट में बजरडीहा निवासी बाबू घायल हो गया था। इस तरह के हादसे कई बार हो चुके है, लेकिन जिम्मेदार अब तक बेखर ही रहे हैं। पुलिस व प्रशासिनक महकमे की अनदेखी की वजह से खतरों का खेल धड़ल्ले से जारी है।
बीएचयू में रसायन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार ने कहा गुब्बारा भरने वाले सिलिंडर में हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल होता है। यह डीजल, पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील होता है। इससे होने वाली घटना में ज्यादा नुकसान होने की संभावना रहती है। हाइड्रोजन जो है वह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से हल्की होती है, इसलिए गुब्बारा भी उड़ने लगता है। कभी कभी गर्म हवा भी गुब्बारा में भरते हैं, जिसकी गर्मी से वहां की हवा हल्की हो जाती है।