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कहीं आप भी तो नहीं कर रहें ये गलती: इंटरनेट पर सर्च किए नंबर, 365 दिन में 114 लोगों ने गंवाए 1.50 करोड़ रुपये

Sat, 16 May 2026 11:05 AM IST
Pragati Chand रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में हर तीसरे दिन कोई न कोई काशीवासी साइबर ठगी का शिकार हो रहा है। इंटरनेट पर नंबर सर्च करने के चक्कर में लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। यही वजह है कि 365 दिन में 114 लोगों ने 1.50 करोड़ रुपये गंवा दिए। 
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साइबर क्राइम - फोटो : AI
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विस्तार
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इंटरनेट पर किसी दुकान, होटल, बैंक या कस्टमर केयर का नंबर सर्च करने के चक्कर में एक साल के अंदर 114 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। साइबर अपराधियों ने फर्जी वेबसाइट, नकली गूगल लिस्टिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खाते खाली कर दिए। इन मामलों में करीब 1.50 करोड़ रुपये की ठगी हुई। 

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आंकड़ों के मुताबिक, हर तीसरे दिन कोई न कोई बनारसी साइबर ठगों का शिकार हुआ। इतना ही नहीं, एक रुपये से पांच रुपये के ट्रांजेक्शन का एडिटेड स्क्रीनशॉट भेजकर साइबर अपराधियों ने दो साल में करीब 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। ये ठगी केवल ऑनलाइन नंबर सर्च करने से जुड़े मामलों में हुई, जबकि अलग-अलग मामलों में साइबर ठगी की रकम करोड़ों में पहुंच चुकी है।

साइबर सेल, थानों और हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज शिकायतों के अनुसार सबसे ज्यादा निशाना शिक्षित और नौकरीपेशा लोग बने हैं। इनमें डॉक्टर, प्रोफेसर, कारोबारी और निजी कंपनियों में काम करने वाले लोग शामिल हैं। युवाओं की संख्या अधिक है, जिनमें युवतियां भी शामिल हैं। कम पढ़े-लिखे लोगों की तुलना में शिक्षित लोग अधिक ठगी का शिकार हुए हैं। ठग खुद को बैंक अधिकारी, होटल मैनेजर, बिजली विभाग का कर्मचारी या ऑनलाइन सर्विस एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद ओटीपी, स्क्रीन शेयरिंग एप या लिंक के जरिए बैंकिंग जानकारी हासिल कर खातों से रकम उड़ा लेते हैं। ज्यादातर मामलों में पीड़ितों ने बाद में शिकायत या प्राथमिकी दर्ज कराई।  
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महिलाओं को भी साइबर अपराधियों ने खूब ठगा

कुल मामलों में हर पांचवां मामला महिलाओं से जुड़ा रहा। पुलिस के अनुसार टेलीग्राम ग्रुप के जरिए घर बैठे कमाई, निवेश पर दोगुना मुनाफा और ऑनलाइन टास्क का लालच देकर दो साल में 70 महिलाओं से करीब 67 लाख रुपये की ठगी की गई। विवेचना में सामने आया कि शुरुआत में कुछ रुपये का फायदा दिखाकर भरोसा जीता गया और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद आरोपी फरार हो गए। मामूली कैशबैक और डिस्काउंट का लालच भी लोगों पर भारी पड़ रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बीते दो वर्षों में फर्जी स्क्रीनशॉट, पांच रुपये कैशबैक, फ्री गिफ्ट और रिवार्ड प्वाइंट के नाम पर 80 लोगों से ठगी की गई। साइबर ठग लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर लेते हैं या बैंक डिटेल हासिल कर खातों से रकम पार कर देते हैं।
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केस- 1
पुलिस लाइन में तैनात एक पुलिसकर्मी साइबर ठगी का शिकार हुआ था। साइबर ठगों ने बातों में उलझाकर उससे 30 हजार रुपये की ठगी कर ली थी। मामले में कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

केस- 2
लंका थाना क्षेत्र निवासी एक प्रोफेसर ऑनलाइन नंबर सर्च करने के दौरान साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर 44 हजार रुपये की ठगी कर ली। उन्होंने मामले की शिकायत दर्ज कराई।

केस- 3
सिगरा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति के साथ नामी कंपनी का नंबर सर्च करने के दौरान 88 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई। मामले की जांच सिगरा पुलिस और साइबर सेल कर रही है।

अधिकारी बोले
वर्जनलोग बिना सत्यापन किए इंटरनेट पर उपलब्ध नंबरों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। लोगों से अपील है कि किसी भी संस्था का नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत एप से ही प्राप्त करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और साइबर पोर्टल पर सूचना दें। समय रहते शिकायत मिलने पर ठगी गई रकम को होल्ड कराया जा सकता है। -विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर क्राइम

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