आरोपियों आशीष यादव, आदर्श, सुजल, युवराज और पीयूष ने पुलिस को बताया कि वे भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर विभिन्न बैंकों में उनके खाते खुलवाते थे। खाते खुलवाने के दौरान मोबाइल नंबर की जगह अपने कब्जे वाले फर्जी नंबर लिंक कराते थे। इसके बाद खाताधारकों से डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की आईडी, पासवर्ड और सिम कार्ड लेकर उन्हें केवल पांच हजार रुपये दे देते थे।
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पुलिस के मुताबिक, इसके बाद इन बैंक खातों की पूरी जानकारी विदेशी साइबर अपराधियों को टेलीग्राम के माध्यम से भेजी जाती थी। विदेशी साथी आरोपियों को एक एपीके फाइल उपलब्ध कराते थे, जिसमें एसएमएस फॉरवर्डर एप्लिकेशन पहले से मौजूद रहता था। इस एप्लिकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल कर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को लॉगिन किया जाता था। इसके बाद ओटीपी और अन्य बैंकिंग संदेश सीधे विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचने लगते थे, जिससे वे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए करते थे। पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।